
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने अयोध्या के भगवान श्री राम मंदिर में हुई चंदे की चोरी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खामोशी पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार इस लूट की निष्पक्ष जांच के बजाय गोलमाल कर रही है और एसआईटी रिपोर्ट के बाद हुई एफआईआर में सिर्फ छोटे कर्मचारियों के नाम हैं, जबकि बड़े लोगों को बचाया जा रहा है। कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने मांग की कि श्रीराम मंदिर ट्रस्ट में जो जिम्मेदार लोग हैं और जिनपर गंभीर आरोप हैं, उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए, ताकि वे जांच एवं सबूतों को प्रभावित न कर सकें।कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह ने मांग की कि श्रीराम मंदिर ट्रस्ट में जो जिम्मेदार लोग हैं और जिनपर गंभीर आरोप हैं, उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए, ताकि वे जांच एवं सबूतों को प्रभावित न कर सकें।
अखिलेश प्रताप सिंह ने आगे कहा कि इस लूट के बाद देशवासियों का इस ट्रस्ट से भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है, इसे तत्काल प्रभाव से भंग किया जाना चाहिए। श्रीराम मंदिर के लिए जमीन की खरीद-फरोख्त में अनियमितता, निर्माण कार्य में कमीशन, सोने-चांदी की ईंटों, आभूषणों और चढ़ावे के पैसों में हुए इस बड़े घोटाले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में निष्पक्षता से कराई जाए।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने खुद अपने पसंदीदा लोगों को ट्रस्ट में शामिल किया था। ऐसे में जब ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लग रहे हैं,तब प्रधानमंत्री की खामोशी कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है। उन्होंने पूछा कि जिन लोगों को सरकार ने चुना और जिनपर देश के करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास की जिम्मेदारी थी,उनके खिलाफ लगे आरोपों पर प्रधानमंत्री आखिर कुछ क्यों नहीं बोल रहे हैं? केंद्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों को घेरते हुए अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि 2019 में अदालत के आदेश के बाद मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ था, जिसके बाद 2020 में केंद्र सरकार ने ट्रस्ट का गठन किया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे मंदिर का निर्माण कार्य आगे बढ़ा, वैसे-वैसे वहां भ्रष्टाचार ने भी अपनी रफ्तार पकड़ ली। शुरुआत में ही जमीन की खरीद-फरोख्त में भारी अनियमितताएं सामने आई थीं, जिनकी सरकार ने जांच की बात कही थी,लेकिन उस जांच का आज तक कुछ पता नहीं चला। ट्रस्ट ने भी वित्तीय जांच के लिए एजेंसियों को नियुक्त किया था। उन एजेंसियों ने अनियमितता संबंधी जानकारी दी और कई सुझाव भी दिए, लेकिन ट्रस्ट ने सुझावों को नजरअंदाज कर दिया।उन्होंने चंदे की चोरी से जुड़ी हालिया मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि कैश काउंटिंग एजेंट महिपाल सिंह को सच उजागर करने पर हटा दिया गया और सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग तक डिलीट कर दी गई। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने शुरुआत में दावा किया था कि कोई उल्लेखनीय गड़बड़ी नहीं हुई, लेकिन जैसे-जैसे मामले की परतें खुलती गईं, ट्रस्ट के ही एक वरिष्ठ सदस्य ने इसे भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि डाका बताया। उन्होंने कहा कि चंपत राय और एक अन्य ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे की खबरें आईं और कुछ ही देर बाद उनका खंडन कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में सरकार की मंशा निष्पक्ष नहीं दिख रही है।कांग्रेस नेता ने कहा कि इस लूट से आम जनता और श्रीराम भक्तों का भरोसा डगमगा गया है, यही कारण है कि मंदिर के चढ़ावे में भारी गिरावट आई है।
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