
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने लोकसभा में महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने वाले संविधान संशोधन विधेयक के गिरने को मोदी सरकार की “असंवैधानिक चाल” की हार और लोकतंत्र व संविधान की जीत बताया।कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी-केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की आधी आबादी को ढाल बनाकर परिसीमन करने की कोशिश की और इस देश के लोकतंत्र, संविधान व संघवाद को चोट पहुंचाने का कुत्सित प्रयास किया। सरकार की ये चालबाज़ी एकजुट विपक्ष-इंडिया ने भांप ली और संविधान संशोधन बिल गिर गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सभी विपक्षी दलों के नेताओं का हृदय से आभार व्यक्त करती है।

उन्होंने कहा कि मोदी-शाह अपनी राजनीति को चमकाने के लिए भारत के लोकतंत्र को तबाह करने चले थे, उनकी ये साज़िश अब औंधे मुंह गिर गई है। कांग्रेस मोदी सरकार से फिर एक बार मांग करती है कि वो 2023 में पारित “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के अनुसार महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के चुनावों से ही दिया जाए। काग्रेस पार्टी सितंबर 2023 से इसकी मांग कर रही है। यह ‘नारी शक्ति’ के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता की असली परीक्षा होगी।लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संविधान संशोधन विधेयक गिरने के बाद शुक्रवार देर शाम संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ये महिला बिल नहीं था, बल्कि हिंदुस्तान के राजनीतिक और इलेक्टोरल स्ट्रक्चर को बदलने की कोशिश थी, संविधान पर आक्रमण था। विपक्ष ने इसे रोक दिया।उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि अगर वह महिला आरक्षण बिल लाना चाहते हैं, तो 2023 का महिला आरक्षण विधेयक आज से लागू कर दें- पूरा विपक्ष उनका 100 प्रतिशत समर्थन देगा। बाद में एक्स पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने खुशी जताई कि संशोधन विधेयक गिर गया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने महिलाओं के नाम पर, संविधान को तोड़ने के लिए, असंवैधानिक तरकीब का इस्तेमाल किया। उन्होंने संविधान की जय की और कहा कि भारत ने देख लिया, इंडिया ने रोक दिया। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने पत्रकारों से कहा कि मोदी सरकार ने महिला आरक्षण को जिस तरह से पेश किया, उसका पास होना नामुमकिन था। भाजपा सरकार ने महिला आरक्षण को परिसीमन और पुरानी जनगणना से जोड़ने का काम किया, जिसमें ओबीसी वर्ग शामिल नहीं था। कांग्रेस कभी इससे सहमत नहीं हो सकती। आज जो हुआ, वह देश के लोकतंत्र और उसकी अखंडता के लिए बहुत बड़ी जीत है। उन्होंने भाजपा पर करारा वार करते हुए कहा कि जिन्होंने हाथरस में कुछ नहीं किया, उन्नाव में कुछ नहीं किया, मणिपुर में कुछ नहीं किया और महिला पहलवानों के लिए कुछ नहीं किया, अब ये लोग महिला विरोधी माइंडसेट की बात करेंगे?एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण इस देश की महिलाओं का हक है जो उनको मिलने से कोई नहीं रोक सकता। एक दिन यह हकीकत में परिवर्तित होकर रहेगा। मगर बदनीयती से इसे 2011 की जनगणना और उस पर आधारित परिसीमन से जोड़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का महिलाओं का मसीहा बनने का खोखला प्रयास आज नाकाम रहा। आज, देश के विपक्ष ने अपनी दृढ़ता और एकजुटता दिखाकर भारत के लोकतंत्र और इसकी अखंडता को अक्षुण्ण रखा है। उन्होंने कहा कि भारत की राजनीति में आज का दिन ऐतिहासिक माना जाएगा। आज से इस देश की आवाज़ को दबाने का काम बंद होगा। उन्होंने विपक्ष के सभी सांसदों का धन्यवाद देते हुए कहा कि अगर ये तीन विधेयक पारित होते तो देश में लोकतंत्र नहीं बचता। अपनी शक्ति का सही इस्तेमाल करके विपक्ष ने इस देश को राजनीति से ऊपर रखा है और देश के हित में अपना कर्तव्य निभाया है।वहीं कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा महिलाओं के आरक्षण (जिस पर पहले ही निर्णय हो चुका था) को अपने खतरनाक परिसीमन प्रस्तावों से जोड़ने का कुटिल और चालाकी भरा प्रयास लोकसभा में निर्णायक रूप से पराजित हो गया है। यह हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था, हमारे संघीय ढांचे और संविधान की जीत है। यह नॉन-बायलॉजिकल, नॉन-गृहस्थ प्रधानमंत्री की वैधता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के लिए आगे का रास्ता स्पष्ट है-उसे 2029 के चुनावों के लिए लोकसभा की मौजूदा व्यवस्था में ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना चाहिए। सितंबर 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के बाद से ही यह पूरे विपक्ष की लगातार मांग रही है- जिसे अंततः कल देर रात अधिसूचित किया गया।
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