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चंडीगढ़ हरियाणा हाइलाइट्स

प्रदेश में पिछले 11 वर्षों में 28 हजार 582 करोड़ रुपये की लागत से 1 हजार 719 किलो मीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों का किया निर्माण-सीएम


अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
चंडीगढ़:हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश  में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के साथ-साथ सड़क सुरक्षा के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। ब्लैक स्पॉट की पहचान और सुधार, ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम का आधुनिकीकरण, जागरूकता अभियान और नई तकनीकों का उपयोग के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री शुक्रवार को चंडीगढ़ में भारतीय सड़क कांग्रेस (आई.आर.सी) एवं लोक निर्माण विभाग हरियाणा द्वारा  ‘सड़क सुरक्षा समाधान’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन करने के पश्चात अपना संबोधन दे रहे थे। कार्यक्रम में हरियाणा के लोक निर्माण एवं जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्वलित कर की। मुख्यमंत्री ने इस दौरान रामनवमी और नवरात्रों की बधाई एवं शुभकामनाएं भी दी। 

सेमिनार में भारतीय सड़क कांग्रेस के प्रतिष्ठित सदस्यगण के अलावा 350 से अधिक विशेषज्ञ, अभियंता. शोधकर्ता, नीति-निर्माता तथा शिक्षाविद शिरकत कर रहे हैं। दो दिनों तक चलने वाली संगोष्ठी में सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार मंथन किया जाएगा।   मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि  ‘सड़क सुरक्षा समाधान विषय पर आयोजित संगोष्ठी देश के भविष्य का रोडमैप तैयार करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। यहां विचार, तकनीक, अनुभव और संकल्प मिलकर भारत को सुरक्षित, सशक्त और विकसित बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि सड़क केवल एक भौतिक संरचना नहीं होती, यह विकास की जीवन रेखा होती है। यह गांव को शहर से जोड़ती है, किसान को बाजार से जोड़ती है, युवा को अवसरों से जोड़ती है और देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर करती है। लेकिन, यह भी एक कटु सत्य है कि जहां सड़क विकास का माध्यम है, वहीं सड़क दुर्घटनाएं हमारे समाज के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। 

सड़क दुर्घटनाओं पर गंभीर चिंता जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में हर वर्ष काफी संख्या में लोग सड़क दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। इन दुर्घटनाओं के पीछे टूटे हुए परिवार, अधूरे सपने और समाज की अपूरणीय क्षति छिपी रहती है। इसलिए सड़क सुरक्षा केवल एक तकनीकी विषय न होकर  सामाजिक, मानवीय और नैतिक जिम्मेदारी से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा का एक और महत्वपूर्ण पहलू है, यातायात नियमों के प्रति जन-जागरूकता। नियम कितने भी अच्छे क्यों न हों, यदि उनका पालन नहीं किया जाएगा, तो उनका कोई अर्थ नहीं रह जाता। हेलमेट पहनना, सीट बेल्ट लगाना, गति सीमा का पालन करना, ये छोटी-छोटी बातें हैं, लेकिन जीवन को बचाती हैं। उन्होंने कहा कि हमें स्कूलों , कॉलेजों और समाज के हर वर्ग तक सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ानी होगी। हमें इसके प्रति और गम्भीर होना होगा।  क्योंकि, सड़क सुरक्षा ही जीवन सुरक्षा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो ‘विकसित भारत 2047’ का संकल्प लिया है। उसे पूरा करने में आधुनिक, सुरक्षित और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की महत्वपूर्ण भूमिका है। उनका यह प्रयास, उनका यह विजन, विकसित भारत-विकसित हरियाणा के निर्माण की दिशा में एक और मील का पत्थर है। उनकी दूरदर्शी सोच, तेज़ निर्णय क्षमता और विकास के प्रति अटूट प्रतिबद्धता ने देश में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में क्रांति ला दी है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि आज, देश भर में, हम कहीं भी जाएं, वहां कोई न कोई बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना का कार्य प्रगति पर है। चाहे वह मेट्रो हो या फ्रेट कॉरिडोर हो, एक्सप्रेसवे हो, बड़े पुल हो या बंदरगाह का विकास हो। देश के हर हिस्से में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास का कार्य हो रहा है। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘रोड सेफ्टी’ को भी उतनी ही प्राथमिकता दी है। उनका स्पष्ट मानना है कि विकास तभी सार्थक है, जब वह सुरक्षित हो। इसी सोच के साथ, आज हमें ऐसी सड़कें बनानी हैं, जो गति के साथ सुरक्षित, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल भी हों। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की इसी सोच के तहत राज्य सरकार ने हरियाणा में पिछले 11 वर्षों में 28 हजार 651 करोड़ रुपये की लागत से 43 हजार 703 किलोमीटर लंबी सड़कों का सुधार किया है। इसके साथ ही, 2 हजार 534 करोड़ रुपये की लागत से 2 हजार 417 किलोमीटर लंबी नई सड़कों का निर्माण आधुनिक तकनीक से किया गया है। इनके अलावा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत प्रदेश में 1 हजार 77 करोड़ रुपये की लागत से 2 हजार 432 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। सरकार ने रेलवे ऊपरगामी व भूमिगत पुल बनाकर रेलवे क्रॉसिंग की समस्या से निजात दिलाई है।  प्रदेश में कुल 759 रेलवे क्रॉसिंग हैं। इनमें से 592 मानव संचालित तथा 167 स्वचालित हैं।  पिछले 11 वर्षों में लगभग 2 हजार करोड़ रुपये की लागत से 97 रेलवे ऊपरगामी व भूमिगत पुलों का निर्माण करवाया है। डबल इंजन सरकार ने हरियाणा में 21 नये राष्ट्रीय राजमार्ग स्वीकृत किए हैं। इनमें से 12 राजमार्ग बन चुके हैं। प्रदेश में पिछले 11 वर्षों में 28 हजार 582 करोड़ रुपये की लागत से 1 हजार 719 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया है। इनके बनने के बाद प्रदेश का कोई भी जिला ऐसा नहीं बचा है, जिसकी कनेक्टिविटी राष्ट्रीय राजमार्ग से न हो। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हैवी व ट्रांसपोर्ट वाहन चालकों के प्रशिक्षण के लिए 7 नए चालक प्रशिक्षण संस्थान शुरू किए गए हैं। इन्हें मिलाकर प्रदेश में चालक प्रशिक्षण संस्थानों की संख्या 22 हो गई है। इनमें पिछले 11 वर्षों में लगभग साढ़े 3 लाख चालकों को प्रशिक्षण दिया गया है। सड़क सुरक्षा के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर वर्ष पूरे राज्य में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह का आयोजन किया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने करनाल के केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर कुंडली, सोनीपत से शंभु, अंबाला तक 128 हाईटेक कैमरे लगाए हैं। इसके परिणामस्वरूप पिछले 1 वर्ष में ओवर स्पीड वाहनों के 4 लाख 80 हजार ई-चालान किए गए हैं। सरकार ने आई.आई.टी. मद्रास के सहयोग से ‘संजया ऐप’ शुरू किया है। यह ऐप सड़क दुर्घटनाओं के प्रबंधन और आंकड़ों का विश्लेषण कर हादसों को कम करने में मदद कर रहा है। इसी तरह प्रदेश में जुलाई, 2021 में हरियाणा-112 आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली का शुरू की     और इसे 1033 तथा ट्रैफिक हेल्पलाइन 1073 से जोड़ा है। आज का युग तेजी से बदलती तकनीकों का युग है और हमें नई तकनीकों का इस्तेमाल दुर्घटनाओं की रोकथाम में करना होगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताते हुए कहा कि दो दिवसीय सेमिनार में कई आधुनिक तकनीकों पर गहन चर्चा होगी, और यहां से निकलने वाले विचार और सुझाव देशभर में सड़क निर्माण और सुरक्षा के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान करेंगे। उन्होंने आह्वान करते हुए कहा कि हमें पर्यावरण के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी को भी समझना होगा। मुख्यमंत्री ने अभियंताओं और शोधकर्ताओं से आग्रह किया  कि वे अपने अनुसंधान को केवल सैद्धांतिक न रखें। उसे व्यावहारिक रूप में लागू करने की दिशा में भी काम करें। देश को आज ऐसे समाधान चाहिए, जो सस्ते हो, टिकाऊ हो और व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकें। 

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