
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद:जिलाधीश आयुष सिन्हा ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला फरीदाबाद में गेहूं एवं अन्य फसलों की कटाई का कार्य प्रारंभ हो चुका है। कटाई के उपरांत कुछ किसानों द्वारा फसल अवशेषों को जलाने की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे उत्पन्न धुआं (स्मॉग) वातावरण में फैलकर पर्यावरण को गंभीर रूप से प्रदूषित करता है। यह न केवल मानव स्वास्थ्य बल्कि पशु-पक्षियों एवं अन्य जीव-जंतुओं के लिए भी हानिकारक सिद्ध होता है।

उन्होंने बताया कि फसल अवशेष जलाने से आगजनी की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है, जिससे मानव जीवन एवं संपत्ति को नुकसान पहुंचने की संभावना बनी रहती है। इसके अतिरिक्त , इससे पशुओं के चारे की कमी भी उत्पन्न हो सकती है। अवशेष जलाने से मिट्टी के लाभकारी जीव (मित्र कीट) नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की उर्वरता घटती है और भविष्य में फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

जिलाधीश ने बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, नई दिल्ली द्वारा फसल अवशेष जलाने पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया गया है तथा इसके उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान है। हरियाणा सरकार द्वारा भी समय-समय पर उक्त आदेशों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसी के तहत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा-163 के अंतर्गत जिला फरीदाबाद में गेहूं एवं अन्य फसलों की कटाई के बाद बचे अवशेषों को जलाने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए हैं।

उन्होंने सभी किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को जलाने से बचें और वैकल्पिक उपाय अपनाएं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि आदेशों की अवहेलना करने पर दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा-223 एवं वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत नियमानुसार सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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