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दिल्ली राजनीतिक राष्ट्रीय हाइलाइट्स

डीएमके सरकार के कानून-व्यवस्था संबंधी दावे पूरी तरह खारिज कर दिए गए“काल्पनिक भूत” बताया-पियूष गोयल


अजीत सिन्हा/नई दिल्ली 
केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता पीयूष गोयल ने मंगलवार कोभाजपा के केंद्रीय कार्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित किया और तमिलनाडु हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के उस आदेश का स्वागत किया, जिसमें तिरुपरनकुंद्रममें सदियों पुरानी दीपम परंपरा को जारी रखने की अनुमति दी गई है। केंद्रीय मंत्रीने इसे श्रद्धालुओं को मिला न्याय और धार्मिक स्वतंत्रता की पुष्टि बताया।गोयल ने डीएमके और इंडी गठबंधन पर आरोप लगाया कि वे बार-बार सनातन धर्म पर हमलाकरते रहे हैं, तुष्टीकरण की राजनीति में लगे हैं और अपील वमहाभियोग प्रस्तावों के जरिए न्यायपालिका को डराने की कोशिश कर रहे हैं। अदालत नेकानून-व्यवस्था को लेकर दिए गए तर्कों को सख्ती से खारिज किया है, जिससे हिंदू विरोधी सोच उजागर होती है। गोयल ने यह भी कहा किसंवैधानिक संस्थाएं संविधान और आस्था की रक्षा कर रही हैं और देश की जनता इंडीगठबंधन की राजनीति को निर्णायक रूप से खारिज करेगी। इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख एवं लोकसभा सांसद  अनिल बलूनी, भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया सह-प्रमुख डॉ. संजय मयूख और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. अजय आलोक भी मंच पर मौजूद थे। गोयल ने कहा कि यह अत्यंत संतोष की बात है कि तमिलनाडु के हाईकोर्ट ने आज दिए गए अपने डिवीजन बेंच के आदेश के माध्यम से तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ियों पर स्थित इस बहुत ही प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर के श्रद्धालुओं को न्यायदिया है, जहाँ भगवान मुरुगन विराजमान हैं।

इस स्थान पर सदियों सेभगवान कार्तिकेय की श्रद्धा में दीप प्रज्वलित किए जाते रहे हैं और सदियों सेहिंदू धर्म में इस दीप प्रज्वलन की परंपरा के माध्यम से भगवान की आराधना की जातीरही है। इस वर्ष यह दीपम 4 दिसंबर 2025 को प्रज्वलित किया जाना प्रस्तावित था। गोयल ने कहा कि यह कोई संयोग नहीं है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन और डीएमकेके अन्य वरिष्ठ नेता लगातार सनातन धर्म का अपमान करते रहे हैं, उसका मजाक उड़ाते रहे हैं और उस पर हमले करते रहे हैं। 2 सितंबर 2023 को उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म कोसमाप्त करने जैसी बेहद आपत्तिजनक और निंदनीय मांग तक कर दी थी। साथ ही, डीएमके की सरकार ने भगवान कार्तिकेय, भगवान मुरुगनसे जुड़े तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप प्रज्वलित करने की कोशिश को भी रोक दिया।इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि डीएमके के शासनकाल में इन धार्मिकआयोजनों को होने नहीं दिया गया और इसी कारण श्रद्धालुओं को न्याय के लिए अदालत कादरवाजा खटखटाना पड़ा। अंततः न्यायमूर्ति स्वामीनाथन ने 1 दिसंबर-2025 को अपने फैसले के माध्यम से थिरुपरंकुन्द्रम में“दीपोत्तिरुविझा” के तहत दीप प्रज्वलन कीसदियों पुरानी परंपरा को जारी रखने की अनुमति दी और श्रद्धालुओं को न्याय मिला। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य सरकार ने न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ अपील दायर की।

इससे साफ तौर पर हिंदू धर्म औरसनातन धर्म के प्रति पक्षपात और हिंदू विरोधी मानसिकता झलकती है। यह कदम दरअसलमुख्यमंत्री स्टालिन, उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन, डीएमके पार्टी और इंडी गठबंधन में उनके साथियों की हिंदू धर्म के प्रतिनफरत को दिखाता है। गोयल ने महाभियोग प्रस्ताव के दस्तावेज़ को दिखाते हुएकहा कि यही मानसिकता न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्तावमें भी दिखाई देती है। यह प्रस्ताव इंडी गठबंधन के अलग-अलग सांसदों द्वारा दियागया है, जिनमें प्रियंका वाड्रा, समाजवादीपार्टी के नेता अखिलेश यादव, धर्मेंद्र यादव और डिंपल यादव,एनसीपी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले, शिवसेना(यूबीटी) के अरविंद सावंत और डीएमके के वरिष्ठ नेता व सांसद ए. राजा शामिल हैं। येसभी इस हिंदू विरोधी प्रयास में आगे खड़े हैं। ये लोग इस महाभियोग प्रस्ताव केजरिए न्यायपालिका को डराने की कोशिश कर रहे हैं और  न्यायमूर्ति जी.आर.स्वामिनाथन पर झूठे आरोप लगा रहे हैं। सिर्फ एक फैसले के आधार पर उन्हें तथाकथित‘धर्मनिरपेक्षता विरोधी’ बता दिया गया,उन पर किसी को पक्षपातपूर्ण लाभ देने का झूठा आरोप लगा दिया गया,एक विशेष समुदाय के वकीलों के पक्ष में झुकाव दिखाने का बेबुनियाददावा कर दिया गया और यहां तक कि न्यायपालिका पर राजनीतिक पक्षधरता या किसी खासविचारधारा का समर्थन करने जैसे हास्यास्पद आरोप भी लगा दिए गए। गोयल ने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि जो लोग खुद को संविधान का कथितरक्षक बताते हैं, वे न्यायपालिका को डराने की कोशिश कररहे हैं, ताकि कोई भी ऐसा फैसला दे जो उन्हें पसंद न आए,उसे इस तरह के महाभियोग प्रस्ताव जैसे उपायों से डराया जा सके। आजमद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच की डिवीजन बेंच, जिसमेंन्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन और न्यायमूर्ति के.के. रामकृष्णन शामिल थे, ने थिरुपरंकुन्द्रम दीप स्थल मामले में निर्णायक निर्देश दिए हैं। यह एकप्राचीन परंपरा है और स्थानीय लोगों की भावनाओं और धर्म का, जोसदियों से चली आ रही है, सम्मान किया जाना चाहिए। दीपस्थल महोत्सव को आयोजित करने की अनुमति दी जानी चाहिए। इस फैसले ने डीएमके सरकार औरडीएमके नेताओं की असली मानसिकता भी उजागर कर दी है। अदालत के निर्णय से स्पष्ट रूपसे दिख गया कि डीएमके और इंडी गठबंधन हिंदू विरोधी हैं, साथही यह स्वीकार किया कि यह एक प्राचीन और ऐतिहासिक परंपरा है और निर्देश दिया किपहाड़ी के शीर्ष पर दीप जलाया जाए। गोयल ने कहा कि तमिलनाडु सरकार द्वारा कानून और व्यवस्था में संभावित समस्याओं का जो तर्क पेश किया गया था, उसे हाईकोर्ट ने पूरी तरहखारिज कर दिया है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि कानून-व्यवस्था का भय केवल राज्य अधिकारियों द्वारा बनाया गया काल्पनिक भूत था। केंद्रीय मंत्री ने अदालत कीटिप्पणी को उद्धृत करते हुए कहा, “कानून और व्यवस्था का भयराज्य अधिकारियों द्वारा निर्मित एक काल्पनिक भूत था।” आखिरकार,कभी भी कोई वास्तविक समस्या नहीं हुई और यह केवल इंडी गठबंधन कीतुष्टीकरण राजनीति थी, जिसमें वे एक समुदाय के सदस्यों कोखुश करने, उस समुदाय से समर्थन पाने की कोशिश कर रहे थे,जिसमें वहां एक छोटी दरगाह है और जिसने सदियों पुरानी दीपस्थलपरंपरा का विरोध किया। उनकी असलियत अब सामने आ चुकी है।  हाईकोर्ट ने स्पष्टकिया कि कानून-व्यवस्था की समस्या केवल तब हो सकती है जब ऐसी अशांति राज्य द्वाराही उत्पन्न की जाए। अदालत ने राज्य सरकार, उसके सोच और उसकेदृष्टिकोण के खिलाफ बहुत मजबूत निंदा की है और स्पष्ट रूप से दिखा दिया कितमिलनाडु में डीएमके और कांग्रेस नेतृत्व वाली इंडी गठबंधन सरकार स्वयं अशांति कोबढ़ावा दे सकती है ताकि अपने हिंदू विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाया जा सके। यह बहुतस्पष्ट है कि इंडी गठबंधन की यह पार्टी और दल, जब अदालत काकोई आदेश उन्हें पसंद नहीं आता, तो वे संविधानिक प्राधिकरणपर हमला करते हैं, संसद में न्यायाधीशों के खिलाफ महाभियोगप्रस्ताव लाते हैं और अपनी तटस्थता पर सवाल उठाते हैं, जबकिखुद को संविधान का रक्षक बताने का दावा करते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब चुनाव आयोग उनके हितों के अनुकूल फैसला नहींदेता, तो उसे बुरा बता दिया जाता है और यह धमकी दी जाती है किअगर कभी वे सत्ता में आए, जो बहुत दूर की संभावना है,तो कानून को पीछे से बदलकर कार्रवाई करेंगे। इस तरह की भारत-विरोधीऔर संविधान-विरोधी गतिविधियों को आज न्यायाधीशों ने अपने आदेश में उजागर करदिया है। यह भारत के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है कि वे समझें और मानें कि आजसंवैधानिक संस्थाएं और अधिकारिक निकाय संविधान की रक्षा कर रही हैं और प्रत्येकनागरिक को बिना किसी बाधा के अपने धर्म का पालन स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके सेकरने का अधिकार सुरक्षित है। इंडी गठबंधन के हिंदू विरोधी दलों, डीएमके, उदयनिधि स्टालिन, एम.के.स्टालिन और तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस सरकार द्वारा किए जाने वाले किसी भीप्रयास को जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी। गोयल ने कहा कि यह तमिलनाडु की जनता के लिए एक चेतावनी है, एक जागने और सतर्क रहने का संदेश भी। देश की जनता को इंडी गठबंधन, कांग्रेस पार्टी, डीएमके, समाजवादीपार्टी और तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियों की इस सोच से खुद को बचाकर रखना होगा।भारत कभी भी तुष्टीकरण की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगा। भारत हर धर्म का सम्मानकरता है और सभी को समान सम्मान देता है, लेकिन जो पार्टियां सनातन धर्म के खिलाफ काम करती हैं और अब यह कह रही हैं कि वे सुप्रीम कोर्ट जाएंगी,उन्होंने डिवीजन बेंच के फैसले और कड़ी टिप्पणियों के बावजूद अभी तकउस निर्णय को स्वीकार नहीं किया है। डीएमके और कांग्रेस इस सच्चाई को पचा नहीं पारहे हैं कि संविधान की जीत हुई है, सनातन की जीत हुई है,आस्था की जीत हुई है और यही वजह है कि उनकी तुष्टीकरण की राजनीतिउन्हें बार-बार अदालतों के दरवाज़े पर ले जा रही है। केंद्रीय मंत्री ने इस तरह कीसोच की कड़ी निंदा की। पीयूष गोयल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे इंडी गठबंधन की निंदा करते हैं, एम.के. स्टालिन और उदयनिधिस्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके की निंदा करते हैं, कांग्रेसपार्टी, समाजवादी पार्टी और अन्य नेताओं जैसे उद्धव ठाकरे औरशरद पवार की हिंदू विरोधी मानसिकता की भी निंदा करते हैं। हमें पूरा विश्वास है किभारत की जनता हर मौके पर इंडी गठबंधन को करारा जवाब देगी, जैसाकि बिहार में हुआ, जैसा कि महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों मेंभाजपा और एनडीए को ऐतिहासिक जीत देकर जनता ने दिखाया है। हर अवसर पर देश की जनताहिंदू विरोधी ताकतों को मुंहतोड़ जवाब देती रहेगी।  

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