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हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ बघोला ने दान की 12 एकड़ जमीन।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
पलवल:हरियाणा में पलवल जिला स्थित गांव बघौला केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बनाया जाएगा. इसकी कवायद शुरू कर दी गई है. हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ ने अपनी 12 एकड़ जमीन विश्वविद्यालय के नाम दान कर दी गई है। शिक्षाविदों की मानें तो इससे हरियाणा व आसपास के राज्यों के युवाओं मे संस्कृत भाषाके प्रति रूचि बढ़ेगी और वह पीएचडी आदि उपाधि लेकर अपना करियर सवांरेंगे. इससे संस्कृत के क्षेत्र में शोध और विकास भी आसान होगा। संस्कृत की पढ़ाई आसान हो, इसको लेकर मौजूदा समय में देश में करीब 12 संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के परिसर है.गांव बघौला मे यह 13वां विश्वविद्यालय होगा. जानकारी के अनुसार केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की शाखा का विस्तार करने के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो.आर जी मुरली कृष्ण  व उनके साथ अन्य अधिकारियों ने बघौला स्थित हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ परिसर का दौरा किया।

विद्या प्रचारिणी सभा एवं प्रधानाचार्य डॉ.पशुपतिनाथ मिश्र ने संस्कृत विश्वविद्यालय बनाए जाने के लिए पलवल रजिस्ट्रार कार्यालय से विद्यापीठ की जमीन दान करने से जुड़े दस्तावेज तैयार करवाकर उन्हें सौंपे। इस मौके पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से कुलपति की टीम में शामिल आदर्श योजना प्रभारी प्रो. कुलदीप शर्मा,शैक्षिक परामर्शदाता मंगेश इंदापवार, विद्या प्रचारिणी सभा बघौला के सचिव दिनेश तायल, लीगल ऑफिसर आशीष पाठक, एडवोकेट लक्ष्य तायल, बघोला सरपंच तुलाराम वशिष्ठ एवं विद्यापीठ के सभी सदस्य तथा छात्र मौजूद रहे।गांव बघौला मे केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बनने की जानकारी पाकर ग्रामीण ख़ुश हैं. उनका कहना है कि इससे बच्चों मे संस्कृत पढ़ने के प्रति रूचि बढ़ेगी. लिहाजा जमीन दान करने के बाद हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ परिसर में स्वागत समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें गांव के सरपंच व गणमान्य लोगों ने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से पहुंची टीम का फूल मालाओं से स्वागत कर आभार जताया। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो.आर जी मुरली कृष्ण ने बताया कि हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ, बघौला  को केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने के लिए वर्ष 1998 से प्रयास चल रहा है। किन्हीं कारणों से यह नहीं हो सका था। कुछ समय पहले गांव के सरपंच सहित कुछ मौजिज लोग विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेडी से मिले। जहां इस विद्यापीठ को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बनाने का प्रस्ताव रखते हुए जमीन दान देने की बात कही। कुलपति जी ने सहर्ष इसे स्वीकार किया। बुधवार को जमीन दान की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। कुलसचिव प्रो.आर जी. मुरली कृष्ण ने कहा शीघ्र ही विश्वविद्यालय बनाने की कार्यप्रणाली शुरू कर दी जाएगी। दिल्ली मुख्यालय के विस्तार परिसर के रूप में इसका पूर्ण रूप से विकास किया जाएगा। सरकार से इसकी अनुमति लेकर जल्द डीपीआर तैयार कराकर नए भवन बनाने व शैक्षणिक कोर्स शुरू करने पर काम किया जाएगा। एकेडमिक काउंसिल से अनुमति लेकर यहां नए शैक्षणिक कोर्स शुरू किए जाएंगे।

पलवल के गांव बघौला फरीदाबाद, गुरुग्राम, नूह आदि जिलों से काफी नजदीक है. इसके अलावा इस गांव से दिल्ली के बदरपुर, जैतपुर, मीठापुर,सरिता विहार, मदनपुर खादर, आली गॉव, यूपी का नोएडा आदि क्षेत्र भी महज 25 से 30 किलोमीटर की दूरी पर है. लिहाजा संस्कृत विद्यापीठ के प्रधानाचार्य पशुपति नाथ मिश्र ने बताया कि यह देश में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का 13 वां परिसर होगा।  केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर बनने से न केवल संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसरों का द्वार खोलेगा, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और भाषा के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस कदम से छात्रों को एक ऐसा मंच मिलेगा जहाँ वे संस्कृत के गहन अध्ययन के साथ-साथ नई खोजों और अनुसंधानों में भी भाग ले सकेंगे। यह निश्चित रूप से हरियाणा और पूरे देश के लिए एक गौरव का क्षण है।

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