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सरकारी स्कूलों के 648 बच्चे नीट और 493 बच्चे जेईई में सफल, इनमें काफी बच्चे बहुत गरीब परिवार से हैं- अरविन्द केजरीवाल

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जेईई और नीट की परीक्षा में सफल होने वाले विद्यार्थियों को आज सम्मानित किया। त्यागराज स्टेडियम में आयोजित समारोह मेंसीएम  अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली ने शिक्षा क्षेत्र में क्रांति लाकर पूरे देश को एक राह दिखाई है। हमारे सरकारी स्कूलों के 648 बच्चे नीट और 493 बच्चे जेईई में सफल हुए हैं। मेरा सपना है कि अपने देश के हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मुहैया कराउं। मुझे खुशी है कि हम लोग कम से कम दिल्ली में हर बच्चे को अच्छी शिक्षा दे पा रहे हैं। आज हमारे स्टूडेंट्स, टीचर्स और प्रिंसिपल्स ने दिल्ली में शिक्षा क्रांति लाकर पूरे देश को दिशा दिखाई है कि सरकारी स्कूल ठीक हो सकते हैं। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि शिक्षा चैरिटी का नहीं, अधिकार का मसला है। देश के हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए। हम हर बच्चे को अच्छी शिक्षा देकर एक पीढ़ी के अंदर अपने देश से गरीबी दूर सकते हैं और दिल्ली में हमने यह करके दिखा दिया है। हम परिवार में सबसे अधिक तवज्जो शिक्षा को देते हैं, तो देश और राज्य के अंदर भी दे सकते हैं। जब हमने सरकार संभाली, तब दिल्ली सरकार का बजट भी सीमित था, लेकिन हमने सबसे पहले बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का फैसला लिया। दिल्ली की तरह पूरे देश के सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा दी जा सकती है और यह संभव है।

दिल्ली सरकार ने जेईई और नीट में सफलता हासिल करने वाले दिल्ली सरकार के स्कूलों के बच्चों को सम्मानित करने के लिए आज त्यागराज स्टेडियम में एक सम्मान समारोह का आयोजन किया। समारोह के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल रहे। इस दौरान उमुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया, शिक्षा सचिव समेत शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। दिल्ली सरकार के निमंत्रण पर सम्मान समारोह में छात्रों के माता-पिता को भी शामिल हुए। समारोह का शुभारम्भ स्वागत गीत के साथ हुआ। इसके बाद नीट और जेईई में सफल होने वाले छात्रों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से अपने अनुभवों को साझा किया। एक-एक बच्चे ने बताया कि कैसे उन्होंने सफलता हासिल की। कई बच्चे ऐसे हैं, जो बेहद गरीब परिवार से आते हैं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आज अच्छे रैंक के साथ डॉक्टर और इंजीनियर बनने जा रहे हैं। इस दौरान इन बच्चों ने अपने शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता भी व्यक्त की। उनका कहना था कि शिक्षकों ने पढ़ाई में उनकी बहुत मदद की, जिसकी बदौलत उनको अच्छी रैंक हासिल करने में आसानी हुई। इस अवसर पर छात्रों को संबोधित करते हुए सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज बहुत महत्वपूर्ण और भावनात्मक दिन है। हम जब एक-एक बच्चे की कहानी सुन रहे थे, तो सबकी आंखों में पानी आ रहा था। एक-एक बच्चे की कहानी किसी करिश्मा से कम नहीं थी। हमारे सरकारी स्कूलों के 648 बच्चे नीट की परीक्षा में सफल हुए हैं। यह बच्चे बहुत गरीब परिवार से आते हैं और विषम परिस्थितियों में रहते हैं। इसमें 199 लड़के हैं और 449 लड़कियां हैं। लड़कियां पूरी तरह से बाजी मार गई हैं। इसी तरह, जेईई में 493 बच्चे सफल हुए हैं। यहां 404 लड़के और 89 लड़किया सफल हुई हैं। इसमें लड़के बाजी मार ले गए हैं। इसका मलतब कि लड़कियां ज्यादा डॉक्टर बनना चाहती हैं और लड़के इंजीनियर बनना चाहते हैं। इस बार दिल्ली के सरकारी स्कूलों के कुल 1141 बच्चों ने जेईई और नीट में सफलता हासिल की है। मैं इन सभी बच्चों, इनके पैरेंट्स और शिक्षकों को शुभकामनाएं देता हूं। अभी हमने एक-एक बच्चे की कहानी भी सुनी। एक बच्चा हर्ष का 569 रैंक आया है। मेरा जेईई में 563 रैंक आया था। 1958 में मैंने जेईई के पेपर दिए थे।

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इस देश ने मुझे बहुत कुछ दिया है। मैं बहुत साधारण व्यक्ति हूं। आज कुछ भी हूं, इस देश की वजह से हूं। मुझे अपनी जिंदगी में बहुत अच्छी शिक्षा मिली है। मेरा एक सपना था कि जो शिक्षा मुझे मेरे देश ने मुझे दी है, वैसी ही अच्छी शिक्षा मैं इस देश के हर बच्चे को मुहैया करा पाउं। चाहे वो गरीब का बच्चा हो या अमीर का बच्चा हो। आज मुझे बेहद खुशी है कि हम लोग कम से कम दिल्ली के अंदर हर गरीब और अमीर के बच्चे को अच्छी से अच्छी शिक्षा मुहैया करा पा रहे हैं। हमारे जितने बच्चों ने सफलता हासिल की है, उन सभी से मेरी विनती है कि आप लोग डॉक्टर और इंजीनियर बनोगे। आप लोग खूब सफल हो और आगे बढ़ो। लेकिन दो बातें हमेशा याद रखना। पहला, अपने परिवार और शिक्षक को मत भूल जाना। कई बच्चों ने अपनी कहानियां सुनाई कि कैसे उनके माता-पिता ने बड़ी कठिन परिस्थितियों में अपना पेट काट कर उनको पढ़ाया है। जब आप डॉक्टर और इंजीनियर बन जाओ, तो अपने मां-बाप और टीचर का ख्याल रखना। दूसरा, देश के लिए कुछ अवश्य करना। आपको जो इतनी अच्छी और फ्री में शिक्षा मिली है, लेकिन कुछ भी फ्री में नहीं मिलता है। आपकी शिक्षा में देश के लोगों का पैसा लगा है। इस देश का गरीब से गरीब आदमी भी टैक्स देता है। दूध, दही, किताब, माचिस खरीदते हैं, तो उस पर टैक्स लगता है। इस देश का एक भिखारी भी टैक्स देता है। गरीब से गरीब लोगों के टैक्स के पैसे से आप लोगों को इतनी शानदार शिक्षा मिली है। इसलिए देश को मत भूल जाना। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जो लोग डॉक्टर बनने जा रहे हैं, आप सभी लोग यहां से कसम खाकर जाओ कि कम से कम आधे मरीज गरीबों के फ्री में देखोगे। जितने इंजीनियर बन रहे हैं, आप भी अपने स्तर पर देश के लिए जो बन सकेगा, वो करना। 5-5, 10-10 बच्चों को पढ़ने में मदद करोगे। आप में से बहुत सारे लोगों को विदेश जाने का मौका मिलेगा। मैं 1989 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढाई पूरी की थी। मेरे नंबर अच्छे आए थे। हमारी क्लास में बहुत सारे बच्चे विदेश चले गए। विदेश जाना बुरी बात नहीं है, लेकिन फिर वापस जरूर आ जाना। रहना अपने देश के अंदर है और मरना अपने देश के अंदर है। ऐसा मत करना कि पढ़ाई यहां से करो और तरक्की अमेरिका की करो। दूसरे देशों से ज्ञान लेकर आना और आकर अपने देश के अंदर काम करना। आज दिल्ली ने एक तरह से पूरे देश को एक राह दिखाई है। इसके लिए मैं सभी शिक्षकों और प्रिंसिपल का आभार व्यक्त करता हूं। सभी बच्चों ने बताया कि टीचर ने उनकी बहुत मदद की। 2014 के पहले जब दिल्ली में हमारी सरकार नहीं बनी थी, तब हम सुना करते थे कि सरकारी शिक्षक तो काम नहीं करते हैं। स्कूल आकर पेड़ के नीचे बैठ कर स्वेटर बुनते रहते हैं। आज वही सरकारी टीचर है। दिल्ली सरकार में 60 हजार सरकारी टीचर हैं। हमने किसी को बदला नहीं है। आज उनको अच्छा माहौल मिल गया और उन्होंने करिश्मा करके दिखा दिया। सीएम अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि हमारे देश में एक तरह से दो समांतर शिक्षा प्रणाली चल रही हैं। एक गरीबों के लिए और एक पैसे वालों के लिए है। गरीबों के लिए सरकारी स्कूल होते हैं और पैसे वालों के लिए प्राइवेट स्कूल होते हैं। दिल्ली में अब सरकारी स्कूलों में काफी सुधार हो गया है, लेकिन पूरे देश के अंदर सरकारी स्कूलों का बेड़ा गर्क है। देश भर के सरकारी स्कूलों में करीब 18 करोड़ बच्चे पढ़ते हैं और देश के अंदर 10 लाख सरकारी स्कूल हैं। कई अच्छे भी सरकारी स्कूल हैं, लेकिन जो खराब हैं, उनकी हालत किसी कबाड़खाने से कम नहीं है, हमें उन्हें ठीक करना है। इन सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे 18 करोड़ बच्चों का भविष्य खराब है। देश के अंदर एक माहौल यह बनता जा रहा था कि सरकार स्कूल चला नहीं सकती। इसलिए सरकारी स्कूलों को प्राइवेट को दे दो। बीच में एक माहौल चल रहा था कि एसएसआर में चैरिटेबल आधार पर कंपनियों को स्कूल दे दो। शिक्षा चैरिटी का मसला नहीं है, शिक्षा अधिकार का मसला है। इस देश में पैदा होने वाले हर बच्चे का अधिकार है कि उसको अच्छी से अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए। किसी के रहमो-करम और चैरिटी के उपर हमारे बच्चे नहीं पढ़ेंगे। देश के अंदर एक यह भी माहौल बना दिया गया कि सरकार स्कूल नहीं चला सकती तो सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया जाएगा। अगर सरकारी स्कूल बंद हो गए, तो इनमें पढ़ने वाले 18 करोड़ बच्चे तो अनपढ़ रह जाएंगे। इन बच्चों के माता-पिता के पास प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने में पैसे नहीं है। अगर हमारे 18 करोड़ बच्चे अनपढ़ रह गए, तो देश आगे कैसे बढ़ेगा। भारत दुनिया का नंबर वन देश कैसे बनेगा। सिर्फ शिक्षा ही भारत को दुनिया का नंबर वन देश बना सकती है। सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज हमने जितने बच्चों की कहानियां सुनी। उनमें किसी बच्चे के पिता 8 हजार, किसी के 10 हजार, तो किसी के पिता 15 हजार रुपए महीना कमाते हैं। अब जब यह बच्चा आईआईटी से पढ़कर आएगा, तो उसकी शुरूआती सैलरी दो लाख रुपए महीना होगा। जो डॉक्टर बनेगा, उसकी शुरूआती सैलरी तीन लाख रुपए महीना होगी। इस तरह इन बच्चों के परिवार अमीर हो गए। हम अपने देश को अमीर पैसे बांट कर नहीं बना सकते, हर बच्चे को अच्छी शिक्षा दे दो और वो  अपने परिवार को अमीर बना लेगा। अगर हम अपने हर बच्चे को अच्छी शिक्षा दे देंगे, तो एक पीढ़ी के अंदर हम अपने देश से गरीबी दूर सकते हैं और यह हमने करके दिखा दिया है। ये लोग पहले कहते थे कि सरकारी स्कूल ठीक नहंी हो सकते। लेकिन हमारे बच्चों व उनके माता-पिता, टीचर्स और प्रिंसिपल ने मिलकर दिल्ली के अंदर शिक्षा क्रांति लाई है, जिसने पूरे देश को दिशा दिखाई है कि सरकारी स्कूल ठीक हो सकते हैं। मैं रोज दूसरे राज्यों में सरकारी स्कूल बंद होने की खबरें पढ़ता हूं। वे कहते हैं कि उनके पास पैसा नहीं है। मैं मानता हूं कि सरकार के पास पैसा सीमित है, लेकिन हमारे उपर है कि हम उस पैसे को कहां खर्च करें। मान लीजिए कि एक गरीब आदमी की सैलरी 20-25 हजार रुपए महीना है। वो सबसे ज्यादा अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा देने को तबज्जो देता है, ताकि बच्चे पढ़-लिखकर बड़े आदमी बन जाएं। इसके बाद बाकी चीजों के बारे में सोचता है। अगर हम परिवार में सबसे अधिक तवज्जो शिक्षा को देते हैं, तो देश और राज्य के अंदर भी हम शिक्षा को सबसे अधिक तवज्जो दे सकते हैं। जब हमने सरकार संभाली तब दिल्ली सरकार का बजट भी सीमित था। लेकिन हमने सबसे पहले बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का फैसला लिया। हमने बच्चों की शिक्षा के उपर जितने पैसे की जरूरत पड़ी, उतना पैसा लगाया। हम कर तो सकते हैं, लेकिन प्राथमिकता की बात है। मेरा दिल कहता है कि दिल्ली के अंदर हमने करके दिखा दिया, यह पूरे देश में हो सकता हैै। देश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 18 करोड़ बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सकती है और यह संभव है। अगर हमने अपने 18 करोड़ बच्चों को अच्छी शिक्षा दे दी, तो हमारा देश अमीर और दुनिया का नंबर वन देश बन जाएगा। 

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