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फरीदाबाद हरियाणा

फरीदाबाद: हैदराबाद की बिल्डर कंपनी ने ऐसा कर दिया सीएम साहब, आपने एनसीजेड की जमीनों पर “एलओवाई” जारी कर दिया।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
फरीदाबाद:मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी हैदराबाद की बिल्डर कंपनी एसवीसी एंव लहरी ग्रुप ने ऐसा क्या कर दिया जिसे आपने नॉन कंस्ट्रक्शन ज़ोन (एनसीजेड) की पांच एकड़ जमीनों पर कंडीशनल “एलओवाई” जारी कर दिया। आपके इस फैसले से सैकड़ों प्लाट होल्डरों में खासा नाराजगी हैं, जिनके सैकड़ों प्लाट्स और मकानें पिछले कई सालों से ना तो बिक पा रहे हैं, ना ही अपनी जमीनों को बेच पा रहे हैं, ना तो लोग अपने पुराने मकानों को तोड़ कर नई सिरे से बना पा रहे हैं, ना ही उसके ऊपर के छत को बेच पा रहे हैं, इन सभी मुश्किलों को प्लाट्स मालिक पिछले कई सालों से झेल रहे हैं, क्यूंकि सैकड़ों प्लाट्स इस वक़्त एनसीजेड में फंसी हुई हैं। और आपने एसवीसी एंव लहरी ग्रुप को एक ही झटके में कंडीशनल “एलोवाई” दे दिया। आप ने ये भी नहीं देखा की इन जमीनों पर हजारों की संख्या में पेड़ लगे हुए थे, उनमें से सैकड़ों पेड़ों को गलत तरीके से चोरी छिपे काट कर जंगलों को साफ़ कर दिया गया ।

इस पर एक मुकदमा नम्बर-24 / 2020 सूरजकुंड थाना में पहले से ही दर्ज हैं। इस केस में चार लोगों को मौके से ही अरेस्ट किया गया था। पेड़ काटने का सिलसिला अब भी धड़ल्लें से जारी हैं। इस मामले में फरीदाबाद जिला फारेस्ट अधिकारी राज कुमार यादव का कहना हैं कि एसवीसी एंव लहरी ग्रुप को पेड़ काटने का उन्होनें कोई परमिशन नहीं दी हैं, यदि पेड़ों के काटने का कार्य जारी हैं, तो अभी वह मौके पर सम्बंधित अधिकारीयों को भेज कर चेक करवाता हूँ। सम्भवता कटे हुए पेड़ का दृश्य पाया गया तो फिर से उस कंपनी खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई अवश्य की जाएगी।

इस संबंध एटीपी (ATP) बिजेंद्र सिंह का कहना हैं कि उन्होनें वर्ष -2018 और जनवरी-2021 में प्रदेश स्तर के कमेटी के पास रिपोर्ट भेजी थी, जिसमें कहा गया था कि ग्रीन फील्ड कॉलोनी में एनसीजेड के दायरे में आने वाले सभी प्लाटों को मुक्त कर दिया जाए। इसके बाद प्रदेश स्तर की कमेटी की एक बैठक भी हुई थी पर इस मामले में कोई फैसला नहीं हो पाया था। अब एसवीसी एंव लहरी ग्रुप को कंडीशनल “एलओवाई” कैसे दी गई हैं। इस बारे में वह कुछ भी नहीं कह सकते,क्यूंकि ये बात उनके ऊपर की बातें हैं। इस मसले पर ग्रीन फील्ड एंव प्रॉपर्टी डीलर्स एसोसिएशन व फीवा के प्रधान आकाश गुप्ता का कहना हैं कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा एसवीसी एंव लहरी ग्रुप को एनसीजेड की 5 एकड़ जमीनों पर कंडीशनल “एलओवाई” जो दिया गया हैं ,

इसके बाद से उनके पास एक-एक करके प्लाट्स होल्डरों के फोन आने का सिलसिला लगातार जारी हैं लोग विरोध जता रहे हैं, उनकी करोड़ों रूपए की जमीनें एनसीजेड में फंसे हुए हैं, के कारण ना तो बिक पा रही हैं, ना ही उस पर फ्लैटों को बना पा रहे हैं, आखिरकार उनकी गलती क्या हैं जो सरकार उन्हें एक तरह की बहुत बड़ी सजा दे रही हैं। वहीँ, हैदराबाद की एसवीसी एंव लहरी ग्रुप को एक ही झटके में कंडीशनल “एलओवाई” जारी कर दिया। उनका कहना हैं कि ग्रीन फील्ड में लगभग 600 ऐसे प्लाट्स हैं जो एनसीजेड में फंसे हुए हैं, ऐसे में मुख्यमंत्री मनोहर लाल सैकड़ों प्लॉट होल्डरों के साथ भेदभाव कैसे कर सकतें हैं,उन्हें करना भी नहीं चाहिए था । ये लोग उनके मतदाता भी हैं जो हर चुनाव में वोट भी देते हैं। सवाल के जवाब में उनका कहना हैं कि पहले ही सैकड़ों लोग प्लाटों को खरीद कर एनसीजेड में फंसे हुए हैं, ऐसे में कंडीशनल “एलओवाई” में काटे गए प्लाटों को ग्राहक खरीदते हैं तो वह लोग भी बुरी तरह से इन जमीनों को खरीद कर फंस जाएंगें , इसका जिम्मेदार कौन होगा।

पीड़ित वी. के. वर्मा का कहना हैं कि उनकी उम्र 78 साल हैं, उनका मकान नंबर-2051, ग्रीन फील्ड कालोनी , फरीदाबाद में हैं , मैं अपने 75 साल की धर्मपत्नी के साथ रहते हैं, वह दोनों अक्सर बीमार रहते हैं, कोरोना काल में उनकी जान बहुत ही मुश्किल से बची थी,

उनका कहना हैं कि वह दोनों पति- पत्नी को चलने फिरने में काफी दिक्कतें हैं, उन्हें इलाज के लिए पैसा चाहिए होता हैं, वह लोग सोचने रहे थे कि ऊपर की मंजिलों को बेच कर अपना खर्चा चला लेंगें , उनके इस मकान का नक्शा भी पास हैं, उनके पास कंपटीशन सर्टिफिकेट भी हैं , पर उनका मकान बिक नहीं रहा हैं, क्यूंकि उनका ये मकान एनसीजेड में हैं, जो भी खरीदार आता हैं वह काफी कम कीमत देने की बात करता हैं ऐसे में वह करे तो क्या करें। ऐसे में मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी को चाहिए था कि एसवीसी एंव लहरी ग्रुप को कंडीशनल “एलओवाई” दी हैं , तो बाकी के लोगों को ये छूट क्यों नहीं दी गई। एनसीजेड से उनके मकान को फ्री अवश्य किया जाना चाहिए था। 

पीड़ित हंस आहूजा का कहना हैं कि ग्रीन फिल्ड कालोनी में उनका 160 गज का कमर्शियल प्लाट हैं जिसे उन्होनें वर्ष-2001 -2002 में ख़रीदा था। अपने इस प्लाट्स पर शॉपिंग कॉम्पलेक्स बनाने के लिए उन्होनें कई बार नक्शा बनवाने के लिए अप्लाई की पर वह हर बार असफल रहे,क्यूंकि उनकी ये प्लॉट एनसीजेड में हैं। उनका कहना हैं कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी ने उनके साथ ऐसा भेद भाव क्यों किया। उन्होनें एक हैदराबाद की कंपनी एसवीसी एंव लहरी ग्रुप को पांच एकड़ जमीन पर जोकि एनसीजेड में फंसी हुई जमीनों को कंडीशनल “एलओवाई” क्यों और कैसे दे दिया। जब उन्हें कोई छूट देना ही था तो सभी प्लाट होल्डरों को देना चाहिए था जिनके प्लाट्स एनसीजेड में फंसे हुए हैं, को राहत तो मिलती पर ऐसा नहीं हुआ। जिसकी वजह से नाराज और निराश हैं, क्यूंकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी ने उनके साथ अच्छा नहीं किया। इस बारे में अजय गोयल ने बातचीत के दौरान बताया कि ग्रीन फील्ड कालोनी में प्लाट न- 2649 हैं, जो 450 गज का हैं, को उन्होनें वर्ष-2016 में खरीदी थी, उन्होनें इस प्लाट पर प्लेट्स बनाने के लिए कई बार नक्शा बनाने के लिए अप्लाई की, पर उनका नक्शा नहीं बन पाया। इसके बाद वह कोर्ट में भी गए पर उन्हें वहां से भी निराशा हाथ लगा। ये सब सिर्फ इस लिए उन्हें झेलना पड़ा की उन की ये प्लाट एनसीजेड में हैं। ऐसे में मुख़्यमंत्री मनोहर लाल ने हैदराबाद की कंपनी एसवीसी एंव लहरी ग्रुप को कंडीशनल “एलओवाई” कैसे दे दी और क्यों दे दी। जब उन्हें राहत ही देना था तो सभी को राहत देते जिनके प्लाट्स एनसीजेड में फंसे हुए हैं। एनसीजेड में फंसे हुए प्लाट्स होल्डरों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मांग की हैं कि या एनसीजेड के दायरे आए सभी प्लाटों को मुक्त किया जाए , अगर ऐसा नहीं करते हैं तो एसवीसी एंव लहरी ग्रुप को एनसीजेड की जमीनों पर दिए गए “एलओवाई” को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए।

 

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