अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
हथीन (पलवल): हथीन उपमंडल के गांव छांयसा में सामने आए मृत्यु एवं गंभीर बीमारी के मामलों के मद्देनजर मंगलवार को केंद्रीय विशेषज्ञों की टीम ने जिला मुख्यालय पलवल तथा गांव छांयसा का दौरा कर स्थिति का विस्तृत आकलन किया। टीम ने मृतक मामलों एवं अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों से विस्तार पूर्वक साक्षात्कार किया।इस संदर्भ में उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने बताया कि जांच के दौरान पाया गया कि सभी मामलों में तीव्र लिवर फेलियर (एक्यूट लिवर फेलियर) की समान स्थिति रही, जिसमें मरीजों के जीवन रक्षक संकेतों (वाइटल पैरामीटर्स) में तेजी से गिरावट तथा मल्टी ऑर्गन फेलियर की स्थिति उत्पन्न हुई।डा. हरीश कुमार वशिष्ठ ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय विशेषज्ञों की टीम द्वारा गांव के वातावरण का निरीक्षण किया गया। केंद्रीय कमेटी के निर्देशानुसार गांव में स्वच्छता को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए हैं।

साथ ही पानी के सभी स्रोतों की नियमित रूप से जांच के निर्देश दिए गए हैं। अधिकांश घरों में पानी की आपूर्ति गांव के बाहर से आने वाले टैंकरों के माध्यम से हो रही है, जबकि कुछ स्थानों पर आर.ओ. सप्लायर से पानी लिया जा रहा है। ग्रामीण अपने दैनिक उपयोग एवं पेयजल को ‘कुंडियों’ में संग्रहित करते हैं, जिसकी नियमित शुद्धिकरण की आवश्यकता बताई गई है। टीम ने सुझाव दिया कि कुंडियों में संग्रहित पानी की नियमित सफाई और शुद्धिकरण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही पानी की केमिकल एनालिसिस एवं हेवी मेटल्स की जांच करवाई जानी आवश्यक है।केंद्रीय टीम ने नल्हड़ स्थित मेडिकल कॉलेज का भी दौरा कर मृतक एवं भर्ती मरीजों के केस रिकॉर्ड की समीक्षा की तथा वहां के चिकित्सकों से विस्तृत चर्चा की। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अब तक गांव में 7 मौतें दर्ज की गई हैं। कुल 4 मामले हेपेटाइटिस ‘बी’ तथा 17 मामले हेपेटाइटिस ‘सी’ के पुष्टि किए गए हैं। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि हेपेटाइटिस बी एवं सी से इस प्रकार की तीव्र मृत्यु की संभावना कम होती है। केंद्रीय टीम ने सुझाव दिया है कि लक्षण युक्त (पेट दर्द, उल्टी आदि) व्यक्तियों की पहचान के लिए घर-घर सर्वे अभियान चलाया जाए तथा हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस ई, लेप्टोस्पायरोसिस एवं स्क्रब टायफस की जांच पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही पेयजल की केमिकल एनालिसिस एवं हेवी मेटल्स की जांच करवाने के निर्देश दिए गए हैं। गांव में स्वास्थ्य विभाग द्वारा 24 घंटे सातों दिन कैंप लगाया जा रहा है। अब तक लगभग 1800 लोगों की स्क्रीनिंग, 1660 रक्त नमूनों की जांच, 118 हेपेटाइटिस टीकाकरण तथा 15,000 से अधिक क्लोरीन की गोलियों का वितरण किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त फॉगिंग करवाई गई है तथा स्वच्छता व उबला हुआ पानी पीने संबंधी स्वास्थ्य सलाह जारी की गई है। इस संदर्भ में उपायुक्त डा. हरीश कुमार वशिष्ठ की अध्यक्षता में उनके कार्यालय में संबंधित विभागीय अधिकारियों की विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपायुक्त ने विशेष रूप से शुद्ध पानी की आपूर्ति के साथ पेयजल तथा पानी के अन्य स्रोतों की जांच के निर्देश दिए हैं।सिविल सर्जन डा. सत्येंद्र वशिष्ठ ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य विभाग की टीमों के माध्यम से लगातार निगरानी,सर्वेक्षण एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल के उपयोग, हाथ धोने की आदत अपनाने तथा उबला हुआ पानी पीने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया है कि स्थिति पर सतत निगरानी रखी जा रही है तथा विशेषज्ञों के सुझावों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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