
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि कुख्यात यौन अपराधी जेफ़री एपस्टीन की फाइल्स और अमेरिका में उद्योगपति अडानी पर चल रहे केस के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 100 प्रतिशत नियंत्रण में हैं। इसी कारण सोमवार को संसद में अपने 25 मिनट के भाषण में उन्होंने अमेरिका के खिलाफ एक शब्द नहीं बोला।गुजरात के वडोदरा में ‘आदिवासी अधिकार संविधान सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध पर प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में भाषण दिया, लेकिन वह इस मुद्दे पर विपक्ष के साथ बहस में हिस्सा नहीं ले सकते, क्योंकि वे ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ हैं।

भारत-अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने हमारी कृषि के दरवाजे किसी दूसरे देश के लिए खोले हैं। उन्होंने कहा कि छोटे खेतों वाले भारत के किसान अमेरिका की मशीनीकृत खेती के सामने टिक नहीं पाएंगे और बर्बाद हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश का पूरा डेटा अमेरिका को सौंप दिया गया है। इसके अलावा भारत अगले पांच साल हर वर्ष लगभग नौ लाख करोड़ रुपये का सामान अमेरिका से खरीदेगा, इससे भारत के लघु और मध्यम उद्योग तबाह हो जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने रूस या ईरान से तेल खरीदने के लिए अमेरिका की अनुमति लेने की बात स्वीकार कर ली है। उनके मुताबिक व्यापार समझौते से अमेरिका के लिए तो टैरिफ कम हो गया है, लेकिन बदले में भारत को कुछ लाभ नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दबाव में होने का पहला कारण एपस्टीन फाइल्स और दूसरा अमेरिका में अडानी पर चल रहा केस है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि नरेंद्र मोदी और भाजपा का पूरा वित्तीय ढांचा अडानी से जुड़ा है। नरेंद्र मोदी ने देशभर के पोर्ट, एयरपोर्ट, सीमेंट कंपनी, सोलर पावर, विंड पावर और सारा इन्फ्रास्ट्रक्चर अडानी को सौंप दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में अडानी पर जो केस है, दरअसल वो नरेंद्र मोदी को धमकाने के लिए है। उन्होंने बताया कि ट्रंप ने यह भी साफ कहा है कि वह मोदी का करियर खत्म कर सकते हैं। राहुल गांधी ने आगे कहा कि ट्रंप के सामने नरेंद्र मोदी कुछ नहीं कह पाते। यही कारण है कि जब ट्रंप भारतीय सेना का अपमान करते हैं और भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने के दावे करते हैं, तो प्रधानमंत्री चुप रहते हैं।

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में आदिवासियों के मुद्दों पर भी भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि ‘आदिवासी’ शब्द का अर्थ है इस देश के मूल निवासी, जिनका हजारों साल से जल, जंगल और जमीन पर अधिकार रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा-आरएसएस जानबूझकर ‘वनवासी’ शब्द का प्रयोग करते हैं ताकि आदिवासियों को उनके अधिकारों से वंचित किया जा सके। उन्होंने कहा कि जब भाजपा आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन को छीनती है तो वह संविधान ही नहीं, बिरसा मुंडा की विरासत पर भी हमला करती है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस की सरकारों ने आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए पेसा कानून, वन अधिकार अधिनियम, मनरेगा, भोजन का अधिकार कानून जैसे कदम उठाए थे। राहुल गांधी ने जाति जनगणना के प्रति अपनी पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि देश को यह जानने का हक है कि आदिवासियों और अन्य वंचित वर्गों की संस्थाओं, कॉरपोरेट क्षेत्र और नौकरशाही में कितनी हिस्सेदारी है। उन्होंने आगे कहा कि निजीकरण से सिर्फ पांच-सात चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचता है। आरक्षण के कारण आदिवासी-दलित-पिछड़े वर्गों के लोगों को पब्लिक सेक्टर में रोज़गार मिलता था, लेकिन अब निजीकरण से उनके अवसर कम हो रहे हैं। उन्होंने अडानी-अंबानी की कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े कॉर्पोरेट ढांचे में आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्गों की हिस्सेदारी नहीं है। इसी तरह देश के अन्य संस्थानों में भी इन वर्गों की भागीदारी नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार अडानी जैसे उद्योग पतियों का लाखों करोड़ रुपये का कर्ज माफ करती है, जबकि आदिवासियों और अन्य वंचित वर्गों को मिलने वाली चंद सुविधाओं को ‘फ्री’ की रेवड़ी कहा जाता है। इस दौरान कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक, विक्रांत भूरिया, अमित चावड़ा, तुषार चौधरी, राजू परगी, अनंत पटेल, कांति खराड़ी, जेनिबेन वसावा, लाल सिंह गमित, अर्जुन राठवा समेत वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
Related posts
0
0
votes
Article Rating
Subscribe
Login
0 Comments
Oldest
Newest
Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

