अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
गुरुग्राम: डीसी अजय कुमार ने कहा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का उद्देश्य बेटियों को शिक्षा और आत्मविश्वास के साथ आत्मनिर्भर बनाना तथा समाज में उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी को बढ़ावा देना है। बेटियों का उत्साह बढ़ाने और उन्हें प्रेरित करने के लिए बुधवार को लघु सचिवालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में एक बैठक आयोजित की गई।छात्राओं को इस बैठक के लिए विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया। पाँच विद्यालयों की 7वीं से 11वीं कक्षा की मेधावी छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें गवर्मेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, वजीराबाद, गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मानेसर, गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल , बेगमपुर खटौला, गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, अर्जुन नगर और गवर्नमेंट मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-43, सुशांत लोक की छात्राएं शामिल थीं। छात्राओं ने अपने सुझाव साझा किए, जिन्हें अभियान के उद्देश्यों में शामिल किया जाएगा।
डीसी अजय कुमार ने छात्राओं से बातचीत में कहा कि उनके स्कूल के दिनों में उन्हें किसी सिविल सेवा अधिकारी से मिलने का अवसर नहीं मिला, लेकिन उनका हमेशा यही उद्देश्य था कि छात्राओं को ऐसे अधिकारियों से मिलकर सवाल पूछने का मौका मिले। उन्होंने छात्राओं को पढ़ाई या अन्य किसी विषय से संबंधित सवाल बेझिझक पूछने के लिए प्रोत्साहित किया।अपने अनुभव साझा करते हुए डीसी ने बताया कि उनका प्रारंभिक चयन आईपीएस अधिकारी के रूप में हुआ और उसके बाद उनका चयन आईएएस पद के लिए हुआ। उन्होंने छात्राओं को लक्ष्य के प्रति लगन और मेहनत की महत्ता बताई और कहा कि यही सफलता की कुंजी है। साथ ही उन्होंने आत्मविश्वास, धैर्य, अनुशासन और असफलताओं से सीखने की भावना को भी सफलता के लिए जरूरी बताया। डीसी ने छात्राओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पाने के लिए लगातार प्रयास करने की प्रेरणा दी।
छात्राओं ने अपने सवाल पूछे, जिनका डीसी ने विस्तार से जवाब दिया। छात्राओं ने डीसी से कई प्रैक्टिकल सवाल पूछे, जैसे अगर हमारा मन पढ़ाई में नहीं लगता तो क्या करना चाहिए?डीसी ने जवाब में कहा कि ऐसे समय पर सबसे पहले अपने छोटे-छोटे लक्ष्य तय करें और धीरे-धीरे उन्हें पूरा करने की आदत डालें। उन्होंने आगे समझाया कि अपने लक्ष्य तय करने के बाद उन्हें हासिल करने के लिए नियमित योजना बनाना, समय का सही इस्तेमाल करना और खुद को लगातार प्रोत्साहित करना जरूरी है। टाइम मैनेजमेंट पर उन्होंने टिप्स देते हुए कहा कि दिनचर्या में प्राथमिकताओं को तय करें, ध्यान भटकाने वाली चीज़ों से दूर रहें और हर दिन थोड़ा समय अपने लिए निकालें। प्रेरणा बनाए रखने के लिए डीसी ने सलाह दी कि रोज़ाना सकारात्मक आदतें अपनाएं, जैसे सुबह जल्दी उठना, व्यायाम करना, पढ़ाई के छोटे-छोटे लक्ष्य पूरे करना, समय का सही इस्तेमाल करना, सकारात्मक सोच बनाए रखना और खुद को समय-समय पर पुरस्कृत करना। उन्होंने कहा कि इन आदतों को अपनाने से न केवल पढ़ाई में मन लगेगा बल्कि लक्ष्य हासिल करने की प्रक्रिया भी आसान और मजेदार हो जाएगी।उन्होंने कहा कि इस प्रकार के संवाद से छात्राओं को अपने करियर और लक्ष्यों के बारे में स्पष्टता मिलती है। बैठक में छात्राओं को सम्मान स्वरूप पुरस्कार भी प्रदान किए गए।बैठक में गुरुग्राम एसडीएम परमजीत चहल, सीटीएम सपना यादव, हिपा की संयुक्त निदेशक ज्योति नागपाल, महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सिमरन, जिला शिक्षा अधिकारी कैप्टन इंदु बोकन तथा पाँचों स्कूलों की अध्यापिकाएँ नीलम, मीना, मधु बाला, शिल्पा और रेनु भी उपस्थित रहीं।
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