
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:राजस्थान के अजमेर में 15 वर्षीय दलित बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसके परिवार पर हुए जानलेवा हमले को लेकर कांग्रेस ने कहा कि भाजपा की राज्य सरकार और पुलिस आरोपियों को बचा रही है। कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता के दौरान अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम ने सरकारी आकंड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में दलित उत्पीड़न के 76 प्रतिशत मामले पांच भाजपा शासित राज्यों में हो रहे हैं। इनमें पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश, दूसरे पर मध्य प्रदेश और तीसरे पर राजस्थान हैं। इसके बाद बिहार और महाराष्ट्र में दलित उत्पीड़न के सर्वाधिक मामले सामने आए हैं। गौतम ने बताया कि जुलाई 2024 में अजमेर में एक 15 वर्षीय दलित बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। आरोपियों ने परिवार को जान से मारने की धमकी देकर उसे चुप रहने पर मजबूर किया। जब बच्ची गर्भवती हुई, तब जाकर मामले का खुलासा हुआ। दिल्ली में जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद केस अजमेर ट्रांसफर किया गया।

पुलिस की लापरवाही को उजागर करते हुए कांग्रेस नेता ने बताया कि सीआरपीसी की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता का बयान दर्ज होने के बावजूद आठ महीने तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। बाद में तीन में से केवल एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जबकि बाकी दो आरोपियों को पुलिस ने महज शांति भंग की धारा के तहत कुछ समय बाद छोड़ दिया। उन्होंने बताया कि 17 मार्च 2026 को पीड़िता का कोर्ट में बयान होना था, लेकिन उससे ठीक एक दिन पहले 16 मार्च को आरोपियों के परिवार ने समझौते का दबाव बनाया। मना करने पर पीड़िता के पिता, चाचा और चाची पर कुल्हाड़ियों से जानलेवा हमला किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपियों द्वारा पीड़िता के परिवार पर दबाव बनाने के लिए उनके खिलाफ एक झूठी एफआईआर भी दर्ज कराई गई, जिसे जांच के बाद पुलिस ने बंद कर दिया।

गौतम ने सवाल उठाया कि धारा 164 के तहत पीड़िता का बयान दर्ज होने के बावजूद बलात्कारियों को छोड़ने की पुलिस की हिम्मत कैसे हुई? उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा सरकार और पुलिस दबंगों को बचा रही है।कांग्रेस नेता ने कहा कि पुलिस ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को उनकी फसल तक नहीं काटने दी गई और समझौते का दबाव बनाने के लिए उनके खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया गया, इसलिए इन आधारों पर भी मुकदमा दर्ज होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कानून के सेक्शन-15(ए) के तहत पीड़िता को संरक्षण देने की जिम्मेदारी सरकार की है, लेकिन उसे बयान दर्ज कराने के लिए भी सुरक्षा नहीं दी गई, इसलिए इस आधार पर भी मामला बनता है। उन्होंने आगे कहा कि एससी-एसटी एक्ट के सेक्शन 4 के अनुसार शिकायत के बावजूद यदि पुलिस अधिकारी कार्रवाई नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ भी मुकदमा बनता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में एएसपी ने एसपी को आरोपियों की गिरफ्तारी की झूठी जानकारी दी, इसलिए एएसपी पर भी मुकदमा दर्ज होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पीड़िता को सुरक्षा दी गई होती तो उसके परिजनों पर जानलेवा हमला नहीं होता।गौतम ने राजस्थान सरकार से पीड़िता और उसके परिजनों को तत्काल सुरक्षा प्रदान करने और मुआवजा देने की मांग की। इसके साथ ही कानून की अवहेलना करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की भी मांग की।इस दौरान गौतम ने 2018 के एससी-एसटी एक्ट बचाओ आंदोलन के दौरान युवाओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखने के लिए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का आभार भी व्यक्त किया। बाबा साहब डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम की जानकारी देते हुए गौतम ने बताया कि आगामी 12 अप्रैल को सुबह 6 बजे दिल्ली के मंडी हाउस से 26 अलीपुर रोड स्थित अंबेडकर परिनिर्वाण स्थल तक ‘रन फ़ॉर अंबेडकर, रन फ़ॉर कॉन्स्टिट्यूशन’ मैराथन (सामाजिक परिवर्तन मैराथन) को राहुल गांधी हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। गौतम ने सामाजिक न्याय और संविधान में विश्वास रखने वाले सभी नागरिकों से इस दौड़ में शामिल होने की अपील की।
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