
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा,ईस्टर्न रेंज-I,की टीम ने आज बुधवार को एक संगठित वीजा फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश किया है,जो भोले-भाले नेपाली नागरिकों को सर्बिया में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठग रहा था। पुलिस टीम ने मुख्य आरोपित जयकाब और रूपेश को गिरफ्तार किया गया तथा उनके कब्जे से 13 नेपाली पासपोर्ट और आपत्तिजनक डिजिटल सबूत बरामद किए गए। गिरफ्तार आरोपितों ने कुल 19 नेपाली नागरिकों से लगभग ₹70 लाख वसूल किए।

प्रकरण के तथ्य
दिल्ली, उप-पुलिस आयुक्त, अपराध शाखा, विक्रम सिंह ने आज जानकारी देते हुए बताया कि गत 22. अगस्त 2025 को नेपाली नागरिक सुजान खड्का (उम्र 22 वर्ष), वर्तमान में नील गगन होटल, पहाड़गंज, दिल्ली में रह रहे थे, ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा, ईस्टर्न रेंज-I में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता के अनुसार, अप्रैल 2024 में आरोपित जयकाब ने शिकायतकर्ता और उसके 18 साथियों से सीलमपुर (जगजीत नगर, दिल्ली) में मुलाकात कर स्वयं को विदेश में नौकरी लगवाने वाला प्रभावशाली व्यक्ति बताया। उसने उन्हें फर्जी सर्बियाई वीज़ा और जॉब ऑफर लेटर दिखाकर विश्वास दिलाया और 19 नेपाली पासपोर्ट अपने पास ले लिए। मई 2024 में आरोपितों ने प्रति व्यक्ति €3500 (कुल लगभग ₹70 लाख) बतौर प्रोसेसिंग शुल्क की मांग की। यह राशि क्यूआर कोड और डिजिटल लेन-देन के माध्यम से सहयोगियों के खातों में जमा कराई गई।जुलाई 2025 में जब सभी पीड़ित नेपाल से दिल्ली पहुंचे तो आरोपित उन्हें टालमटोल करने लगा और अंततः पासपोर्ट व पैसे लौटाने से इनकार कर दिया। जब उन्होंने दबाव बनाया तो आरोपितों ने जान से मारने की धमकी भी दी। बाद में जांच में पाया गया कि दिखाए गए सभी वीज़ा पूरी तरह फर्जी थे। इस पर थाना अपराध शाखा, दिल्ली में एफ़आईआर संख्या 222/25 दिनांक 25.08.2025 भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं के अंतर्गत दर्ज की गई।
जांच एवं गिरफ्तारी
गुप्त सूचना पर पुलिस टीम ने मुख्य आरोपित जयकाब (41 वर्ष) पुत्र स्व. जय प्रकाश, निवासी ग्रीन ग्राम चिपियाना बुजुर्ग, ग्रेटर नोएडा (उ.प्र.) को गिरफ्तार किया।
बरामदगी:
13 नेपाली पासपोर्ट
मोबाइल फ़ोन (आपत्तिजनक चैट सहित)
पूछताछ में जयकाब ने अपने सहयोगियों सचिन, जॉर्ज @ बिजोज और रूपेश का नाम बताया। इसके बाद छापेमारी कर पुलिस ने रूपेश (42 वर्ष) पुत्र राज किशोर सिंह, निवासी तिरशूल कॉलोनी, छावला, दिल्ली को गिरफ्तार किया। अन्य आरोपितों की तलाश जारी है।
बरामद सामान
(i) 13 नेपाली पासपोर्ट
(ii) 2 मोबाइल फ़ोन (वीवो कंपनी)
कार्यप्रणाली
आरोपी:
1. नेपाली युवाओं को विदेश में नौकरी का लालच देकर निशाना बनाते।
2. फर्जी वीजा व जॉब ऑफर दिखाकर विश्वास दिलाते।
3. डिजिटल लेन-देन द्वारा मोटी रकम वसूलते और पासपोर्ट अपने पास रख लेते।
4. पैसे मिलने के बाद गायब हो जाते और विरोध करने पर धमकी देते।
पूछताछ में खुलासा
जयकाब – मूल निवासी ग्राम गोहावर जैत, थाना नूरपुर, जिला बिजनौर (उ.प्र.)। 12वीं तक पिथौरागढ़ (उत्तराखंड) में पढ़ाई की। नेपाली भाषा में दक्ष होने के कारण नेपाली व भारतीय युवाओं को विदेश भेजने का झांसा देकर ठगता था। साथी रूपेश, सचिन व जॉर्ज के साथ मिलकर अब तक दर्जनों युवाओं से ₹5–10 लाख प्रति व्यक्ति ठगे।
रूपेश – मूल निवासी जिला सीवान (बिहार)। बी.कॉम स्नातक, पिछले 15 वर्षों से ट्रैवल एजेंट। जयकाब के साथ पिछले 4 वर्षों से जुड़ा था। दोनों मिलकर सर्बिया, खाड़ी देशों व यूरोप में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से पासपोर्ट व मोटी रकम ठगते थे।
धन लेन-देन
कुल ₹60 लाख नेपाल से भारत लाए गए।
राशि नेपाल के राजाराम से आरोपित जयकाब तक पहुँची।
नेपाली नागरिक आशीष पांडे ने नेपाल से बैंक खातों का इंतज़ाम किया।
दिल्ली में हवाला के जरिए रूपेश ने रकम हासिल की।
रूपेश ने लगभग ₹20 लाख जयकाब की पत्नी पूजा (कोटक महिंद्रा बैंक) तथा मित्रों कोशल (PNB) और बसंत (कोटक महिंद्रा) के खातों में जमा किए।
पुलिस की अपील
दिल्ली पुलिस जनता से अपील करती है कि बिना सत्यापन किसी एजेंट के झांसे में न आएं। विदेश में नौकरी दिलाने का दावा करने वाले फर्जी रैकेट से सावधान रहें। अपराध शाखा ऐसे संगठित गिरोहों को तोड़ने और दोषियों को कानून के कटघरे में खड़ा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

