
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:भारतीय युवा कांग्रेस ने अरावली पर्वत श्रृंखला को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर चिंता जताते हुए मोदी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं और आगामी 07 जनवरी से ‘अरावली सत्याग्रह यात्रा’ निकालने का ऐलान किया है। इंदिरा भवन स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर चिंता जताई, जिसमें अरावली की परिभाषा बदलते हुए 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को संरक्षण के दायरे से बाहर करने का प्रावधान किया गया है। चिब ने मोदी सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे उत्तर भारत की सभ्यता और पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि युवा कांग्रेस ने ‘अरावली सत्याग्रह’ नाम से ऑनलाइन पिटिशन शुरू किया, जिसमें एक लाख से ज्यादा लोग अब तक जुड़ चुके हैं। उन्होंने घोषणा की कि युवा कांग्रेस द्वारा 07 जनवरी से 20 जनवरी तक ‘अरावली सत्याग्रह यात्रा’ निकाली जाएगी, जो गुजरात बॉर्डर से शुरू होकर राजस्थान, हरियाणा होते हुए दिल्ली पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि इस यात्रा के जरिए उनकी मांग है कि 100 मीटर वाले प्रावधान को रद्द किया जाए, पूरे अरावली जोन को क्रिटिकल इकोलॉजिकल जोन घोषित किया जाए, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की समीक्षा हो, सरकार प्रस्ताव वापस ले और अरावली में खनन पर तरह पूरी तरह रोक लगाई जाए।

उदय भानु चिब ने कहा कि अरावली सिर्फ पहाड़ नहीं, बल्कि उत्तर भारत का सुरक्षा कवच है। यह डेढ़ अरब साल पुरानी श्रृंखला दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और पश्चिमी यूपी में पानी का स्तर बनाए रखती है, प्रदूषण रोकती है, रेगिस्तान के फैलाव को थामती है और तापमान नियंत्रित करती है। लेकिन भाजपा सरकार ने पहले देश की संस्कृति और भाईचारे को प्रदूषित किया, अब पर्यावरण को नष्ट करने पर तुली है।उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में अरावली रेंज में खनन को अवैध बताया था, लेकिन अब कहा है कि जो पहाड़ 100 मीटर से कम होंगे, वे अरावली का हिस्सा नहीं माने जाएंगे। चिब ने कहा कि सच्चाई ये है कि 90 प्रतिशत पहाड़ 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले हैं।उदय भानु चिब ने कहा कि भाजपा सरकार ने खुद सुप्रीम कोर्ट को प्रस्ताव भेजा था कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले पहाड़ को अरावली रेंज से हटा दिया जाए। पहले सुप्रीम कोर्ट की कमेटी खनन पर निगरानी रखती थी, लेकिन मोदी सरकार ने उसे भंग कर दिया और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा इस प्रस्ताव को भेजा गया। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में लिखा है कि नई माइनिंग तभी शुरू हो सकती है, जब सरकार प्रस्ताव लाए। आदेश में एक और बात लिखी गई है कि अरावली रेंज में अगर रेयर अर्थ मेटल मिलेगा, तो उसका खनन हो सकता है। ऐसे में सवाल है कि क्या इस परियोजना को भी मोदी के परममित्र अडानी को सौंपा जाएगा? युवा कांग्रेस अध्यक्ष ने राजस्थान की भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 50 नई खनन परियोजनाओं को लाइसेंस दिए गए और 2010 से बंद पड़ी 250 परियोजनाओं को फिर से शुरू करने के लिए फीस ली जा रही है। उन्होंने इसे आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार दिया और कहा कि कांग्रेस देश के बच्चों का भविष्य बचाएगी।उन्होंने कहा कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार तानाशाही छोड़कर पर्यावरण और आने वाली पीढ़ी के साथ न्याय नहीं करती।
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