अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने अमेरिका के साथ हाल में हुए व्यापार समझौते को भारत के हितों के साथ विश्वासघात और सरेंडर करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने घुटने टेक दिए हैं। पार्टी कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस के मीडिया व पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन एवं प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि यह बराबरी का समझौता नहीं, बल्कि दबाव और ब्लैकमेल में कराया गया सरेंडर है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “नाम नरेंद्र और काम सरेंडर।” उन्होंने कहा कि मोदी सरकार दिल्ली नहीं, अमेरिका के टाइम जोन के हिसाब से चल रही है। सारे फैसले अमेरिका की शर्तों पर हो रहे हैं।खेड़ा ने आरोप लगाया कि इस समझौते से भारत की अर्थव्यवस्था, कृषि क्षेत्र, एमएसएमई सेक्टर और मध्यम वर्ग के हित प्रभावित होंगे, जबकि अमेरिका को बड़ा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारत के लिए अमेरिका सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण ट्रेड सरप्लस वाला पार्टनर था। कई दशकों से भारत ने भारी मात्रा में अमेरिका को निर्यात किया और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया।

उन्होंने बताया कि अब स्थिति बदल जाएगी। इस नए समझौते के तहत भारत को अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का आयात करना होगा। इस के लिए भारत को सालाना आयात 40-42 अरब डॉलर से बढ़ाकर लगभग 100 अरब डॉलर करना पड़ेगा। उन्होंने सवाल किया कि कमजोर होती अर्थव्यवस्था और रुपए पर दबाव के बीच यह अतिरिक्त आयात कैसे संभव होगा। साथ ही सरकार यह स्पष्ट नहीं कर रही है कि किन-किन उत्पादों का आयात किया जाएगा ।उन्होंने कहा कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने यह तो बताया कि कौन-कौन से अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत में नहीं आएंगे, लेकिन यह नहीं बताया कि कौन-कौन से उत्पाद भारत आएंगे। उनसे पूछना चाहिए कि इन उत्पादों की सूची कहां से आएगी? उन्होंने कहा कि पीयूष गोयल जो बता रहे हैं, उससे अधिक वह महत्वपूर्ण है जो वो छिपा रहे हैं।पवन खेड़ा ने कहा कि पहले अमेरिकी टैरिफ तीन प्रतिशत थे, जिन्हें बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया और अब 18 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार इसे रियायत बताकर जश्न मना रही है, जबकि यह पहले की तुलना में अधिक है।रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका द्वारा भारत पर नजर रखने की बात पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि नजर चोरों पर रखी जाती है। क्या प्रधानमंत्री इस बात से खुश हैं कि हमें चोर की तरह पेश किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि यह भारत के आत्मसम्मान और रणनीतिक स्वायत्तता पर आघात है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को संसद में बोलने से रोका जा रहा है, क्योंकि सरकार को सच सामने आने का डर है। खेड़ा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीजफायर के समय कांग्रेस को संदेह था कि सरकार अमेरिका के दबाव में समझौता कर रही है और अब वह संदेह विश्वास में बदल गया है।कांग्रेस नेता ने यह भी सवाल उठाया कि क्या प्रधानमंत्री मोदी का नाम एपस्टीन फाइल्स में आने या अडानी-अंबानी के हितों की रक्षा के दबाव में यह समझौता किया गया।सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जब रूस से तेल आयात पर सवाल पूछा जाता है तो वाणिज्य मंत्री इसे विदेश मंत्रालय का मामला बताते हैं और विदेश मंत्री से जब व्यापार समझौते को लेकर सवाल पूछा जाता है तो वे इसे वाणिज्य मंत्रालय का विषय बताते हैं। वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अलग बयान देते हैं, जिसके बाद विदेश मंत्रालय को सफाई देनी पड़ती है।
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