
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कुख्यात यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन के बीच संबंधों की क्रोनोलॉजी पेश करते हुए कहा है कि भारत के महत्व पूर्ण फैसले विदेशी लॉबी और बिचौलियों के इशारे पर लिए जा रहे हैं। पार्टी ने दावा किया कि वर्ष 2014 के बाद पश्चिम एशिया को लेकर भारत की पुरानी विदेश नीति की दिशा अमेरिका-इजराइल लॉबी के प्रभाव में बदल गई है। कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और एपस्टीन जैसे लोग पीएम मोदी को एक रोबोट की तरह देखते हैं। उन्होंने कहा कि एपस्टीन फाइल्स से यह खुलासा होता है कि अमेरिकी-इजरायली लॉबी के दबाव में भारत की दशकों पुरानी संतुलित दो राष्ट्र समाधान की विदेश नीति को बदल दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे हालात में इजराइल गए हैं जब अमेरिका कभी भी भारत के पुराने साथी ईरान पर हमला कर सकता है। इससे पहले ही वे ट्रंप की धमकियों से डरकर ईरान और रूस से तेल आयात करना बंद कर चुके हैं।

खेड़ा ने मोदी सरकार में एपस्टीन के दखल को पुख्ता तरीके से उजागर करते हुए 2017 की कुछ महत्वपूर्ण ईमेल्स का विवरण पेश किया। उन्होंने कहा कि 4 जनवरी 2017 को हरदीप सिंह पुरी ने एपस्टीन को मिलने के लिए मेल भेजा। फरवरी 2017 में एपस्टीन ने अनिल अंबानी का परिचय इजरायल के पूर्व पीएम एहुद बराक से करवाया। मार्च 2017 में अनिल अंबानी ने एपस्टीन से अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग को लेकर सलाह मांगी, जिसके बदले में भारत का पूरा बाजार देने की बात कही गई। इसके बाद एपस्टीन ने एहुद बराक को मेल कर पूछा कि अमेरिका के रक्षा मामलों में भारत की क्या भूमिका हो सकती है? खेड़ा ने पूछा कि अंबानी किसके कहने पर एपस्टीन से यह बातचीत कर रहे थे।

खेड़ा ने आगे कहा कि 15-18 मई 2017 को फिलिस्तीन के राष्ट्राध्यक्ष महमूद अब्बास भारत आए। यह अमेरिका, एपस्टीन, नेतन्याहू और एहुद बराक को पसंद नहीं आया। इस पर एपस्टीन ने हरदीप पुरी से नाराजगी जताई। इसके बाद 25-26 जून 2017 को मोदी अमेरिका गए, फिर 4-6 जुलाई 2017 को इजराइल गए लेकिन फिलिस्तीन नहीं गए। 6 जुलाई 2017 को एपस्टीन ने कतर के बिजनेसमैन जाबोर वाई को लिखा कि ‘भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने सलाह मानी और अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करने के लिए इजराइल में नृत्य और गायन किया। यह कारगर साबित हुआ’। खेड़ा ने बताया कि 29 मार्च 2017 की एपस्टीन की एक ईमेल के मुताबिक पीएम मोदी की पूरी अमेरिका और इजराइल यात्रा ‘इजराइल स्ट्रेटजी’ को आगे बढ़ाने के लिए थी। उन्होंने कहा कि यह शर्मनाक है कि भारत की विदेश नीति तय करने में भारतीय विदेश मंत्रालय और राजदूतों की कोई भूमिका नहीं थी।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की 2017 की इजराइल यात्रा और तत्कालीन राष्ट्रपति ट्रंप से उनकी मुलाकात का एजेंडा एपस्टीन और इजराइल के पूर्व पीएम एहुद बराक तय कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब रोबोट प्रधानमंत्री का कंट्रोल ही गलत हाथों में होगा तो सही काम कैसे होगा, सही विदेश नीति कैसे तय होगी?कांग्रेस नेता ने बताया कि 2017 के बाद भारत के इजरायल के साथ हुए अरबों डॉलर के रक्षा सौदे और समझौते इसी नेटवर्क का परिणाम हैं। खेड़ा ने कहा कि भारत के टैक्सपेयर्स का पैसा कहां इस्तेमाल होगा, यह एपस्टीन तय कर रहा था, जिसमें हरदीप पुरी और अनिल अंबानी उसकी मदद कर रहे थे। कांग्रेस नेता ने व्हाइट हाउस के तत्कालीन मुख्य रणनीति कार स्टीव बैनन और एपस्टीन के बीच हुई बातचीत का भी हवाला दिया, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक तय करने की बातें कही गई थीं। उन्होंने बताया कि एपस्टीन ने स्टीव बैनन से कहा था कि उन्हें मोदी से मिलना चाहिए। वह उन दोनों की बैठक करवा सकते हैं। पवन खेड़ा ने प्रमुख सवाल किए कि क्या भारत का रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय सिर्फ रबर स्टैंप बनकर रह गए थे? क्या एक विदेशी यौन अपराधी (एपस्टीन) यह तय कर रहा था कि भारत अमेरिका से जेट इंजन खरीदेगा या नहीं? अनिल अंबानी किसके संदेशवाहक के तौर पर एपस्टीन और स्टीव बैनन से मिलने की जल्दी में थे?खेड़ा ने तीखे शब्दों में कहा कि भले ही एपस्टीन मर चुका हो, लेकिन उसकी सोच और उसके द्वारा बुना गया नेटवर्क आज भी मोदी सरकार की नीतियों में जिंदा है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्रों को रक्षा सौदों में शामिल करना इस पूरी लॉबी का मुख्य उद्देश्य था क्योंकि वह सरकारी क्षेत्र को भ्रष्ट मानती थी।
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