अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के कुख्यात यौन अपराधी एपस्टीन के साथ संबंधों को लेकर नए खुलासे करते हुए उनके इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। पार्टी ने खुलासा किया है कि पुरी और एपस्टीन के बीच 2014 से 2017 के बीच गहरा संपर्क था और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के 20 दिनों के भीतर ही उनकी मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया था। कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए कांग्रेस के मीडिया व पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन एवं प्रवक्ता पवन खेड़ा ने हरदीप सिंह पुरी के हालिया इंटरव्यू को झूठ का पुलिंदा करार दिया। उन्होंने कहा कि पुरी ने एपस्टीन के साथ केवल तीन-चार मुलाकातों की बात कही है, जबकि उनके बीच 62 ईमेल के आदान-प्रदान और 14 मुलाकातों के दस्तावेजी सबूत हैं। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि हरदीप पुरी 2014-17 के बीच एपस्टीन से बार-बार क्यों मिल रहे थे? प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण के तुरंत बाद ही यह संपर्क क्यों शुरू हुआ? जब 2014 में हरदीप पुरी सरकार का हिस्सा नहीं थे, तो वे किस हैसियत से एपस्टीन के साथ भारत सरकार की नीतियों और आधिकारिक घोषणा के आठ महीने पहले ही ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे प्रोजेक्ट्स पर चर्चा कर रहे थे? उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री ने ‘डिजिटल इंडिया’ के बारे में भारत की जनता से पहले एपस्टीन को बताने के निर्देश दिए थे? किसके दबाव में पुरी ने सजायाफ्ता अपराधी एपस्टीन के साथ संबंध बनाए रखे? क्या भारत की विदेश और रक्षा नीति में एपस्टीन गिरोह का हस्तक्षेप था?

पवन खेड़ा ने एपस्टीन से संबंधों का हवाला देते हुए अरबपति बिल गेट्स के भारत में आयोजित हो रहे एआई समिट में शामिल होने पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार गेट्स से भी डरती है, इसलिए सूत्रों के हवाले से कह रही है कि गेट्स को दिया गया निमंत्रण वापस ले लिया गया है, जबकि खुद बिल गेट्स कह रहे हैं कि वह समिट में आएंगे और भाषण देंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार एपस्टीन के पीड़ितों के साथ खड़ी है, तो उसे सूत्रों के माध्यम से कुछ कहने की क्या जरूरत है? उन्होंने कहा कि सोमवार को आंध्र प्रदेश में मुख्यमंत्री बिल गेट्स का स्वागत कर रहे थे और दो दिन पहले नरेंद्र मोदी के द्वारा हरदीप पुरी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी जा रही थीं, यानी भाजपा और उसके सहयोगी सभी को क्लीन चिट देने का काम कर रहे हैं। खेड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इकबाल मिट्टी में मिल चुका है, वे एपस्टीन के गिरोह के सदस्यों से डरते हैं। खेड़ा ने कहा कि हरदीप पुरी लिंक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन के पीछे छिपने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनका झूठ उजागर हो रहा है। उन्होंने बताया कि पुरी जेफरी एपस्टीन को ही मेल भेजते थे और उसकी प्रति हॉफमैन को भी भेज देते थे। एपस्टीन द्वारा हॉफ़मैन को भेजी गई एक ईमेल का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें पुरी को ‘योर मैन इन इंडिया’ यानी भारत में आपका आदमी बताया गया। खेड़ा ने आरोप लगाया कि पुरी एपस्टीन के कहने पर बैठक आयोजित कर रहे थे और भारत की विदेश नीति पर प्रभाव डाल रहे थे। उन्होंने कहा कि पुरी ने पहले कहा कि उनका परिचय रीड हॉफमैन से किसी और ने कराया, जबकि बाद में खुद स्वीकार किया कि मुलाकात एपस्टीन के जरिए ही हुई थी।उन्होंने पूछा कि क्या एपस्टीन फाइल्स की वजह से ही अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते में मोदी सरकार ने सरेंडर कर दिया। क्या इसीलिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार भारत का अपमान कर रहे हैं? क्या इसी कारण मोदी सरकार चुप रहती है? क्या भेद खुलने के डर से केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी का इस्तीफा नहीं लिया जा रहा है?
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