
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़: पूरे विधानसभा सत्र के दौरान बीजेपी सरकार सदन में कांग्रेस के सवालों और जनहित के मुद्दों से भागती नजर आई। ये कहना है पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा का। शीतकालीन सत्र के समाप्त होने पर हुड्डा की प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने सरकार के रुख पर सख्त आपत्ति जताते हुए कहा कि पूरे सत्र के दौरान सरकार चर्चा और सवालों से भागती नजर आई। यह पहली बार हुआ है कि कांग्रेस का एक भी स्थगन प्रस्ताव, काम रोको प्रस्ताव या अल्पकालिक चर्चा का प्रस्ताव मंजूर नहीं किया गया। कांग्रेस ने किसान, बेरोजगार युवा, भर्ती घोटाले, एमएसपी, धान घोटाला, मनरेगा, भ्रष्टाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य, खिलाड़ियों की मौत, एसवाईएल, चंडीगढ़ तथा हेट स्पीच समेत हरियाणा के हक से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने के लिए प्रस्ताव दिए थे, लेकिन सरकार ने एक का भी जवाब नहीं दिया। सदन को गुमराह करते हुए विपक्ष को मूकदर्शक बनाने की बार बार कोशिश की गई और कांग्रेस ने इसलिए बार बार वाकआउट करना पड़ा।

अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान भी सरकार कांग्रेस के उठाए मुद्दों पर पूरी तरह खामोश रही। यहां तक कि हरियाणा सरकार चंडीगढ़ के स्टेटस को भी स्पष्ट नहीं कर पाई। हुड्डा ने कहा कि अरावली को लेकर आए नए नियमों का सबसे ज्यादा नुकसान हरियाणा को होगा। प्रदेश की भाजपा सरकार को इसका विरोध करना चाहिए था, लेकिन अवैध खनन समेत अरावली के विनाश के मुद्दे पर भी सरकार खामोश रही।एसवाईएल मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला हरियाणा के पक्ष में आ चुका है, लेकिन आज तक सरकार हरियाणा के हक का पानी नहीं ले पाई। इतना ही नहीं, इस मसले पर सर्वदलीय प्रतिनिधि मंडल की प्रधानमंत्री से मुलाकात भी आज तक नहीं हो पाई।नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार जनता के मुद्दों से भाग रही है और सदन में जवाबदेही से बच रही है। कांग्रेस हरियाणा के हितों की रक्षा के लिए सदन के अंदर और बाहर संघर्ष जारी रखेगी।
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