अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने केंद्र की भाजपा सरकार पर अनुसूचित जाति और आदिवासियों के बजट के पैसे का उपयोग अन्य कार्यों में किए जाने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी ने यह भी कहा कि इन वर्गों के लिए पिछले कई वर्षों से लक्षित योजनाओं का बजट लगातार घट रहा है।कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने बताया कि मोदी सरकार द्वारा हाल ही में पेश किए गए 58 लाख करोड़ के कुल बजट में से अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 1,96,400 करोड़ रुपये और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 1,41,089 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों के विश्लेषण से पता चलता है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्गों के बजट का केवल 41 प्रतिशत ही वास्तव में उनके विकास के लिए उपयोग किया जा रहा है। 42 प्रतिशत पैसा सामान्य योजनाओं और 17 प्रतिशत ऐसी योजनाओं में जा रहा है, जिनका दलितों-आदिवासियों से सीधा संबंध नहीं है।

गौतम ने कहा कि एससी-एसटी के बजट में से यूरिया सब्सिडी के लिए 14,584 करोड़ रुपये, फर्टिलाइजर सब्सिडी के लिए 6,804 करोड़ रुपये, टेलीकॉम कंपेंसेशन के लिए 2,539 करोड़ रुपये, इंफ्रास्ट्रक्चर मेंटेनेंस के लिए 2,535 करोड़ रुपये और रोड वर्क्स के लिए 10,150 करोड़ रुपये दिया गया, जबकि एससी-एसटी समुदायों के अधिकांश लोग भूमिहीन हैं और कृषि सब्सिडी का लाभ उन्हें नहीं मिलता।राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि इन वर्गों के लिए पिछले कई वर्षों से लक्षित योजनाओं का बजट लगातार घट रहा है और रिवाइज्ड बजट में इसे और कम कर दिया जाता है। कई योजनाओं में फंड सरेंडर हो जाता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि सरकार धन की कमी का बहाना बनाकर बच्चों के सपने तोड़ रही है।

नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप के तहत चयनित 106 बच्चों में से केवल 40 बच्चे ही विदेश जा पाए, जबकि 66 बच्चों को ‘फंड की कमी’ बताकर रोक दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले चार वर्षों में उच्च शिक्षा के दौरान 48,000 बच्चों ने आत्महत्या की, जिनमें अधिकांश एससी-एसटी और ओबीसी समाज से थे। उन्होंने इसका मुख्य कारण जातिगत भेदभाव और भारी-भरकम फीस बताया। उन्होंने कहा कि छात्रों की स्कॉलरशिप समय पर नहीं आती, जिससे कर्ज़ बढ़ जाता है और परेशान होकर छात्र या तो शिक्षा बीच में ही छोड़ देते हैं या खुदकुशी जैसे गलत कदम उठा लेते हैं। उन्होंने कहा कि एससी-एसटी फाइनेंस डेवलपमेंट कॉरपोरेशनों की स्थिति भी अच्छी नहीं है और बजट की कमी के चलते ये एससी-एसटी वर्ग के छात्रों को ऋण नहीं दे पा रहे हैं। वहीं आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया ने बजट को चोरी का सबूत बताते हुए कहा कि आदिवासियों के लिए आवंटित 1.41 लाख करोड़ रुपये में से वास्तव में लक्षित बजट मात्र 64,000 करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि ट्राइबल सब-प्लान का बजट केवल आदिवासियों के लिए स्वीकृत होने के बावजूद उसका इस्तेमाल दूसरे विभागों में किया जा रहा है। उन्होंने उदाहरण दिया कि इंदौर मेट्रो और प्रधानमंत्री की सभाओं में यह पैसा खर्च किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने मांग की है कि केंद्र सरकार एक केंद्रीय कानून लाए, ताकि एससी-एसटी का बजट उन्हीं के लिए उपयोग हो और लैप्स न हो।
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