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हरियाणा पुलिस का इंटेलिजेंस आधारित क्राइम मॉनिटरिंग मॉडल मजबूत, 45,207 सक्रिय अपराधियों का तैयार किया गया डेटाबेस

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
चंडीगढ़: हरियाणा पुलिस द्वारा संगठित अपराध और सक्रिय अपराधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए अपनाए गए आरजेएसएफ (RJSF) पैटर्न को अब प्रदेश भर में और मजबूती से लागू किया जा रहा है। इस इंटेलिजेंस आधारित मॉडल के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों में सक्रिय अपराधियों की पहचान, उनकी वर्तमान स्थिति की जांच तथा उनके आपराधिक रिकॉर्ड का लगातार सत्यापन किया जा रहा है। प्रदेश में 1 फरवरी 2026 से लेकर 25 अगस्त 2026 तक कुल 45,207 सक्रिय अपराधियों का डाटाबेस तैयार किया गया है, जिनमें से 26,026 अपराधियों की जांच पूरी की जा चुकी है। इस प्रकार कुल सक्रिय अपराधियों में से 57.57 प्रतिशत की जांच पूरी हो चुकी है।

पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बदलते अपराध के स्वरूप को देखते हुए पुलिसिंग को इंटेलिजेंस आधारित, तकनीक समर्थित और डेटा संचालित बनाया जाए। उन्होंने कहा कि सक्रिय अपराधियों की लगातार जांच और उनके रिकॉर्ड को अपडेट रखना अपराध नियंत्रण की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अपराधियों की वर्तमान स्थिति, गतिविधियों और आपराधिक संपर्कों से संबंधित सूचनाओं को नियमित रूप से अपडेट किया जाए तथा जहां भी किसी अपराधी की गतिविधि संदिग्ध अथवा सक्रिय पाई जाती है, वहां तत्काल एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। डीजीपी ने कहा कि हर अपराधी की सही पहचान, वर्तमान स्थिति और गतिविधियों की जानकारी पुलिस के पास होना अपराध नियंत्रण की पहली आवश्यकता है। हमारा लक्ष्य केवल अपराधियों का रिकॉर्ड रखना नहीं, बल्कि उपलब्ध डेटा का उपयोग कर अपराध को होने से पहले रोकना है। आरजेएसएफ पैटर्न पर की जा रही साप्ताहिक जांच के तहत सक्रिय अपराधियों की वर्तमान स्थिति का लगातार सत्यापन एवं रिकॉर्ड अपडेट किया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कुल 45,207 सक्रिय अपराधियों में से अब तक 26,026 अपराधियों की स्थिति सत्यापित की जा चुकी है। जांच के दौरान 7,425 अपराधी अपने दर्ज पतों पर उपलब्ध पाए गए, जबकि 1,612 अपराधी जेल में पाए गए। वहीं 375 अपराधियों की मृत्यु हो चुकी है। इस व्यापक सत्यापन प्रक्रिया से हरियाणा पुलिस को सक्रिय अपराधियों की वर्तमान स्थिति का सटीक और अपडेटेड डेटा उपलब्ध हो रहा है, जिससे उनकी निगरानी और अपराध नियंत्रण की कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। शेष 19,137 अपराधियों का सत्यापन भी प्राथमिकता के आधार पर जारी है, ताकि प्रत्येक अपराधी के संबंध में अपडेटेड जानकारी पुलिस के पास उपलब्ध हो और आवश्यकता के अनुसार समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। आरजेएसएफ पैटर्न के तहत केवल अपराधियों की संख्या और आपराधिक इतिहास दर्ज करने तक सीमित न रहते हुए उनकी वर्तमान गतिविधियों और पुलिस रिकॉर्ड को अपडेट किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार अब तक 6,762 अपराधियों का FRS डेटा अपलोड किया जा चुका है। इससे अपराधियों की पहचान और उनकी गतिविधियों की निगरानी को तकनीकी रूप से और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य अपराधियों के संबंध में उपलब्ध सूचनाओं को एकीकृत कर फील्ड पुलिसिंग, तकनीकी निगरानी और इंटेलिजेंस इनपुट को एक-दूसरे से जोड़ना है, ताकि किसी अपराधी की गतिविधि में बदलाव सामने आने पर समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कानून एवं व्यवस्था संजय कुमार ने बताया कि आरजेएसएफ मॉडल की शुरुआत रोहतक, झज्जर, सोनीपत और फरीदाबाद जैसे अपराध की दृष्टि से संवेदनशील जिलों में अपराधियों की व्यवस्थित निगरानी के उद्देश्य से की गई । इस मॉडल में अपराधियों की प्रोफाइलिंग, उनकी वर्तमान स्थिति का सत्यापन, आपराधिक नेटवर्क की पहचान और फील्ड स्तर पर निगरानी को एक साथ जोड़ा गया। इस पहल से प्राप्त अनुभव के आधार पर  तथा इसकी सफलता को देखते हुए अब इसी प्रकार की डेटा संचालित और इंटेलिजेंस आधारित क्राइम मॉनिटरिंग को प्रदेश के अन्य जिलों में भी प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है।आरजेएसएफ पैटर्न पर चल रही जांच में कई जिलों ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। रोहतक, झज्जर और फरीदाबाद में 100 प्रतिशत सक्रिय अपराधियों की जांच पूरी की जा चुकी है। हिसार में 99.11 प्रतिशत, सोनीपत में 93.13 प्रतिशत तथा सिरसा में 81.97 प्रतिशत अपराधियों की जांच पूरी हो चुकी है। इसी प्रकार कैथल में 68.43 प्रतिशत, जींद में 62.82 प्रतिशत तथा फतेहाबाद में 57.49 प्रतिशत सक्रिय अपराधियों की जांच पूरी की जा चुकी है। इससे स्पष्ट है कि जिलों में अपराधियों की वास्तविक स्थिति के सत्यापन और डेटा अपडेट करने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जा रही है।हरियाणा पुलिस की इस पहल का प्रमुख उद्देश्य अपराध होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय अपराध की संभावित परिस्थितियों और अपराधियों की गतिविधियों को पहले ही चिन्हित करना है। सक्रिय अपराधियों की नियमित जांच से पुलिस को यह पता लगाने में मदद मिलती है कि कौन से अपराधी अभी सक्रिय हैं, कौन जेल में हैं, कौन फरार हैं और किन अपराधियों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी की आवश्यकता है। इसके साथ ही अपराधियों के बीच संभावित संपर्क, आपराधिक नेटवर्क और नए व्यक्तियों को संगठित अपराध में शामिल करने के प्रयासों की पहचान पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।हरियाणा पुलिस द्वारा तैयार किए जा रहे इस विस्तृत डेटाबेस का उद्देश्य जिलों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को भी मजबूत करना है। अपराधी किसी एक जिले की सीमा तक सीमित नहीं रहते, ऐसे में एक जिले में उपलब्ध महत्वपूर्ण सूचना दूसरे जिले की पुलिस के लिए भी उपयोगी हो सकती है।आरजेएसएफ पैटर्न के माध्यम से अपराधियों की जानकारी को अधिक व्यवस्थित एवं अपडेटेड स्वरूप में उपलब्ध कराने से अंतर-जिला समन्वय, अपराधियों की निगरानी और त्वरित पुलिस कार्रवाई को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

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