अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने 3,260 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के जरिए हुए 10,000 करोड़ रुपये से अधिक के टैक्स घोटाले की जांच के लिए तत्काल संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने की मांग की है। कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि इस मामले में गंभीर अनियमितताओं के सामने आने के बावजूद मोदी सरकार ने एक साल से अपने चहेतों को बचाने के लिए अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की है।

बेहद संगीन खुलासा करते हुए गोहिल ने कहा कि इस घोटाले को लेकर अगस्त 2025 में एडीआर की रिपोर्ट आई थी, लेकिन मोदी सरकार ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। झारखंड आयकर विभाग के कुछ निष्पक्ष अधिकारियों ने भी इस फर्जीवाड़े में आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की थी, तो सत्ता में बैठे आकाओं ने उन्हें रोक दिया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने इसे देश के इतिहास का सबसे बड़ा टैक्स घोटाला बताते हुए कहा कि भाजपा ने देश भर में 3,260 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को अपनी ‘सी-टीम’ के रूप में खड़ा कर बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी और काले धन को सफेद करवाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे फर्जी दलों को चंदा देकर टैक्स चोरी करने वाले बोगस डोनर्स पर आयकर अधिनियम के तहत 200 प्रतिशत जुर्माना लगाने तथा आपराधिक मामले दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि इस घोटाले में शामिल चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और फर्जी दलों के कर्ता-धर्ताओं के खिलाफ भी सख्त आपराधिक कार्रवाई हो, फर्जीवाड़ा करने वाले लोगों और कंपनियों के नाम सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही यह भी उजागर किया जाए कि इन फर्जी दलों को चलाने वाले कितने लोग अब भाजपा में शामिल हैं।
गोहिल ने बताया कि आयकर नियमों के अनुसार पांच करोड़ रुपये से अधिक की आय पर कुल 42.7 प्रतिशत टैक्स लगता है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत राजनीतिक दलों को दिए गए चंदे पर टैक्स-छूट संबंधी प्रावधान हैं, जिनका दुरुपयोग कर इन फर्जी राजनीतिक दलों को दस हजार करोड़ रुपये से अधिक का चंदा दिया गया। इसके बदले इन फर्जी दलों के लोगों ने दो से 15 प्रतिशत तक अपना कमीशन काटकर शेष राशि चंदा देने वालों को लौटा दी। उन्होंने कहा कि आयकर विभाग और टैक्स ट्रिब्यूनल ने भी इस फर्जीवाड़े को स्वीकार किया है।गोहिल ने बताया कि इस तरह के फर्जीवाड़े से निपटने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि आयकर अधिनियम के तहत डिडक्शन की पूरी राशि वापस लेने के साथ-साथ उस पर ब्याज और 200 प्रतिशत तक टैक्स लगाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त धारा 276सी(1) और धारा 277 के तहत इस तरह की जालसाजी करने वालों पर आपराधिक मुकदमा चलाकर सात साल तक की जेल का प्रावधान है। गोहिल ने यह भी कहा कि वर्ष 2014 में चुनाव आयोग ने राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए थे। इसके तहत राज्य चुनाव अधिकारियों की यह जिम्मेदारी थी कि वे राजनीतिक दलों को मिले चंदे और उनके खर्च का पूरा ब्योरा अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करें तथा आयकर विभाग को सूचित करें, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं किया गया। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काले धन के मुद्दे पर बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन आज वे इसे लेकर एकदम चुप हैं। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जीडीपी के फर्जी आंकड़ों के सहारे देश चलाया जा रहा है और आम जनता को रुलाने का काम किया जा रहा है।
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