
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस की बर्बर कार्रवाई का मुद्दा उठाने और इसके लिए गृह मंत्री को जिम्मेदार ठहराने के कारण बुधवार को उन्हें संसद में बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गृह मंत्री अमित शाह को तुरंत पद से हटाने, छात्रों पर बर्बरता की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र उच्च-स्तरीय समिति से जांच कराने और सरकार द्वारा अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने की मांग की।गृह मंत्री को इस बर्बर कार्रवाई के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि छात्रों पर हमला किसके आदेश पर हुआ? उन्होंने कहा कि पैलेट गन और घातक बल का इस्तेमाल गृह मंत्री की अनुमति या आदेश के बिना नहीं किया जा सकता। इंदिरा भवन में पत्रकार वार्ता करते हुए राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि इस मामले में केवल दो ही स्थितियां संभव हैं। उन्होंने कहा कि या तो गृह मंत्री के सीधे आदेश पर छात्रों पर जानलेवा बल प्रयोग हुआ है, या फिर उन्हें इस बारे में जानकारी ही नहीं थी। उन्होंने कहा कि पहली स्थिति में अमित शाह गुनहगार हैं और दूसरी स्थिति में वे नाकाबिल हैं, इसलिए दोनों ही हालातों में अमित शाह को गृह मंत्री के पद से तुरंत हटाया जाना चाहिए।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्रों पर हिंसा दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) ने की, जो कि गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि 25 जुलाई को उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर पूछा था कि क्या छात्रों पर घातक बल इस्तेमाल करने का आदेश उन्होंने दिया था और सादे कपड़ों में छात्रों को लाठियों से मारने वाले लोग कौन थे? लेकिन उनके इन सवालों का कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने बुधवार को लोकसभा में अमित शाह की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर अमित शाह छात्रों पर बर्बर हमले के जिम्मेदार नहीं होते तो सदन में आकर जवाब दे देते।
राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें संसद में बोलने से रोका गया। उन्होंने बताया कि सत्ता पक्ष की ओर से उनसे माफी मांगने के बाद ही भाषण जारी रखने की बात कही गई थी। उन्होंने इस शर्त को पूरी तरह खारिज करते हुए दो टूक कहा कि वे भाजपा, आरएसएस या उनसे जुड़े किसी भी संगठन से कभी माफी नहीं मांगेंगे। नेता प्रतिपक्ष होने के नाते महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाना उनका अधिकार है।राहुल गांधी ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे शांतिपूर्ण प्रदर्शन कारी छात्रों पर बेहद अमानवीय बर्बरता की गई। छात्रों को तितर-बितर करने के लिए साधारण पुलिस कार्रवाई के बजाय पैलेट गन, कील लगी लाठियों और इलेक्ट्रिक शॉक बैटन जैसे घातक हथियारों का इस्तेमाल हुआ। एक पीड़ित युवा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आंख में छर्रा लगने की वजह से वह शायद अपनी दृष्टि हमेशा के लिए खो चुका है। इसके अलावा प्रदर्शन के दौरान छात्राओं और पत्रकारों के साथ भी मारपीट की गई। उन्होंने कहा कि छात्रों के खिलाफ फेशियल रिकग्निशन का इस्तेमाल किया जा रहा है और उन्हें डराने के लिए बजरंग दल का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि वे दोबारा अपनी आवाज न उठाएं।
राहुल गांधी ने दोहराया कि जब तक पीड़ित छात्रों पर हमला करने वालों को सजा नहीं मिल जाती, विपक्ष मजबूती से उनकी आवाज उठाता रहेगा।
मोदी व शाह पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश में एक छवि बनाई गई है कि अमित शाह देश के ‘हीरो’ हैं और नरेंद्र मोदी ‘भगवान’ हैं। इस छवि को बनाए रखने में हजारों करोड़ रुपये फूंके जा रहे हैं। मीडिया, दिल्ली पुलिस, आरएएफ सबको लगाया गया, ताकि छवि का गुब्बारा न फट जाए, लेकिन यह गुब्बारा फट चुका है।
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