अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को संसद में कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है और इसका प्रभाव देश की आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ेगा। उन्होंने ‘भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए उभरती चुनौतियां’ विषय पर सदन में नियम 176 के तहत अल्पकालिक चर्चा कराए जाने की मांग की। राज्यसभा में पश्चिम एशिया की स्थिति पर तत्काल चर्चा कराने से मोदी सरकार के लगातार इनकार के कारण सभी विपक्षी सांसदों ने पूरे दिन के लिए वॉकआउट भी किया। राज्यसभा में अपने संबोधन में भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों को रेखांकित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है। साथ ही, भारत की छवि भी प्रभावित हो रही है।
उन्होंने याद दिलाया कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। उन्होंने कहा कि संघर्ष बढ़ने से देश की आर्थिक स्थिरता पर भी सीधा प्रभाव पड़ेगा। उस क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय कार्यरत हैं, जिनकी सुरक्षा और आजीविका वहां की स्थिरता पर निर्भर करती है। उन्होंने कुछ भारतीयों के मारे जाने और लापता होने की खबरों पर भी अपनी चिंता जताई।उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों से भारत को सालाना लगभग 51 बिलियन यूएस डॉलर की राशि भेजी जाती है, जो लाखों भारतीय परिवारों की जीवनरेखा है। खरगे ने अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बीच देश में बढ़ती महंगाई की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि इन वैश्विक परिस्थितियों का बोझ गरीब परिवारों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में रसोई गैस सिलेंडर के दाम में लगभग 60 रुपये और कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में 115 रुपये की वृद्धि हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष ने सभापति से अनुरोध किया कि इस गंभीर विषय पर सदन में चर्चा कराई जाए। हालांकि उनके वक्तव्य के दौरान सत्ता पक्ष की ओर से व्यवधान डाला गया, लेकिन इस सबके बावजूद खरगे ने देश की साख और जनता के हितों की रक्षा की बात मजबूती से उठाई। राज्यसभा में वक्तव्य से पहले उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि मौजूदा भू-राजनीतिक संकट पर विदेश मंत्री का एकतरफा बयान समाधान नहीं है। हमें सामूहिक रूप से देश को विश्वास में लेना होगा। भारत सरकार को हमारी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने, हमारे व्यापारियों की सहायता करने, हमारे निर्यात के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और कीमतों में बढ़ोतरी के जरिए जनता पर बोझ डालना बंद करने के लिए एक विस्तृत आकस्मिक योजना सामने रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष जनता के प्रति संवेदनशीलता की मांग करता है।

कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा कि मंत्रियों द्वारा दिए गए ऐसे बयान, जिन पर न तो कोई सवाल पूछा जा सकता है और न ही कोई स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है, उनका कोई मतलब नहीं है।संसद के मकर द्वार पर किया विरोध प्रदर्शन, प्रधानमंत्री मोदी पर देश के हितों से समझौता करने का लगाया आरोप. सोमवार को दिन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसदों ने खाड़ी युद्ध पर केंद्र सरकार की चुप्पी के खिलाफ संसद परिसर में प्रदर्शन भी किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया। इस दौरान राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्लैकमेल हो चुके हैं, वह पूरी तरह कंप्रोमाइज्ड हैं और इसी वजह से संसद में इस मुद्दे पर चर्चा से बच रहे हैं। वे संसद में नहीं आएंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई से भारत की अर्थ व्यवस्था को भारी नुकसान होने वाला है, लेकिन कंप्रोमाइज्ड प्रधानमंत्री में इस पर चर्चा करने का साहस नहीं है।महंगाई और आर्थिक पहलुओं की चर्चा करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति जनता से जुड़ा हुआ मुद्दा है और इस पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस विषय पर चर्चा की मांग इसलिए कर रहा है, क्योंकि इसका सीधा असर देश की जनता और भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि शेयर बाजार गिर रहा है, एलपीजी की कीमतें बढ़ रही हैं और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं। इसका सीधा असर भारत के आम आदमी, घरेलू बजट और छोटे व मध्यम व्यवसायों पर पड़ रहा है।
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