अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध भारत के हर घर तक असर डालेगा और देश में खाद्य तथा ऊर्जा महंगाई की लहर आने वाली है, जिसके लिए मोदी सरकार तैयार नहीं है। पार्टी ने ईरान के खिलाफ युद्ध और उसके सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की हत्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को ‘आपराधिक’ बताते हुए कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की नैतिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने कहा कि पश्चिम एशिया के घटनाक्रम का सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य कीमतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
प्रधानमंत्री के हालिया इजरायल दौरे के समय पर भी सवाल उठाते हुए पवन खेड़ा ने पूछा कि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमला करने तथा खामेनेई की हत्या से 48 घंटे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे का उद्देश्य क्या था। उन्होंने कहा कि आज ग्लोबल साउथ के अधिकतर देश इजराइल से दूरी बनाना चाहते हैं, मगर मोदी खुशी-खुशी वहां चले गए। उन्होंने एपस्टीन फाइलों में प्रधानमंत्री के इजरायल में गाने और नाचने के उल्लेख का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ‘गैंग्स ऑफ एपस्टीन’ की कठपुतली बन गए हैं। उन्होंने दोहराया कि वे कॉम्प्रोमाइज़्ड हैं और एपस्टीन फाइलों व अमेरिका में चल रहे अडानी केस के दबाव में हैं।

युद्ध के भारत पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव को लेकर भी चिंता जताते हुए खेड़ा ने कहा कि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया है। वहां से सिर्फ रूस और चीन के जहाज ही जा सकते हैं, भारत के जहाज नहीं। इसके बंद होने से दस हजार करोड़ का भारतीय सामान, 38 जहाज और 1100 भारतीय नाविक फंसे हुए हैं। शिप ओनर्स एसोसिएशन ने सरकार से मदद की अपील की है, लेकिन मोदी सरकार ने ईरान के साथ बातचीत के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने का असर भारत में कच्चे तेल, सीएनजी व एलपीजी की आपूर्ति पर पड़ेगा और इसका प्रभाव आम लोगों की रसोई तक पहुंचेगा। इसके अलावा देश के फर्टिलाइजर, ट्रांसपोर्ट, माइनिंग, रेलवे, पावर और कृषि समेत कई क्षेत्रों पर इसका असर पड़ेगा, जिससे आने वाले समय में महंगाई बढ़ेगी और मंदी आएगी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नौ फरवरी को तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा में कहा था कि भारत के पास 74 दिनों का पेट्रोलियम भंडार है, जबकि अब सरकार केवल 25 दिनों का स्टॉक होने की बात कह रही है। ऐसे में लगभग 45 दिनों का भंडार आखिर कहां चला गया, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
खेड़ा ने जोर देकर कहा कि यह केवल मानवीय मुद्दा नहीं है, बल्कि ईरान के साथ भारत के सदियों पुराने संबंधों का भी सवाल है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि भारत हमेशा वैश्विक नियम-आधारित व्यवस्था का समर्थक रहा है, जिसे नरेंद्र मोदी ने रौंद दिया है। एक संप्रभु देश पर हमला हुआ और उसके सर्वोच्च नेता की हत्या कर दी गई, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी चुप हैं। प्रधानमंत्री ईरानी दूतावास में संवेदना व्यक्त करने तक नहीं गए, जबकि वह प्रधानमंत्री कार्यालय से कुछ ही किलोमीटर दूर है।
पवन खेड़ा ने हिंद महासागर क्षेत्र में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा एक ईरानी जहाज पर किए गए हमले की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह जहाज भारत के नौसैनिक अभ्यास में शामिल हुआ था और वह भारत का अतिथि था। उन्होंने कहा कि भारत के रणनीतिक हितों को देखते हुए यह गंभीर मामला है। भारत की प्रतिष्ठा और प्रभाव में गिरावट के कारण ही ऐसे हालात बने हैं। उन्होंने बताया कि इस नौसैनिक अभ्यास में अमेरिका ने आखिरी समय में अपने जहाज भेजने से मना कर दिया था। उन्होंने पूछा कि क्या भारत को पहले से जानकारी थी कि अमेरिका हिंद महासागर में ऐसा करने वाला है, अगर थी तो उसने क्या किया और नहीं थी तो सरकार ने अपने अतिथि की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए? उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार ने साल 1986 में वॉयस ऑफ अमेरिका को श्रीलंका में हिंद महासागर के निकट अपना ट्रांसमीटर तक लगाने की अनुमति नहीं दी थी। कांग्रेस प्रवक्ता ने यह भी मांग की कि मोदी सरकार अमेरिकी पूर्व सैनिक के उस दावे का स्पष्ट रूप से खंडन करें, जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी सेना भारतीय बंदरगाहों का इस्तेमाल कर रही थी। उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल प्रेस सूचना ब्यूरो की ओर से सफाई आई है, जबकि प्रधानमंत्री कार्यालय और रक्षा मंत्रालय अब तक चुप हैं।
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