अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़: सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने लोकसभा में नियम 377 के तहत रूस के युद्ध क्षेत्र में फंसे भारतीय युवाओं, खासकर छात्रों की सुरक्षित वतन वापसी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह मामला भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, सरकार की विदेश नीति, कूटनीतिक प्रभाव से सीधे जुड़ा है। दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि अनेक युवा तो ऐसे भी हैं जिन्हें या तो विदेशों में बंधक बना लिया गया है या एजेंटों ने धोखे से उन्हें विदेशी सेना में भर्ती करवाकर रूस-यूक्रेन में झोंक दिया है। अनेक युवा ऐसे भी हैं जिनका परिवार को कुछ अता-पता ही नहीं लग रहा है। कई महीनों से इन युवकों का परिवार से संपर्क नहीं हो पाया रहा है। उनकी चिंता में परेशान और गहरी पीड़ा झेल रहे परिवार के लोग राज्य सरकार से लेकर केंद्र सरकार तक गुहार लगा चुके हैं। लेकिन ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है।

सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने मांग करी कि इस मामले को शीर्ष प्राथमिकता पर लिया जाए और कूटनीतिक माध्यमों के ज़रिये तत्काल हस्तक्षेप और रूसी सरकार से उच्च स्तर पर बातचीत कर सभी भारतीय नागरिकों की वतन वापसी सुनिश्चित की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लापता भारतीय नागरिकों का पता लगाया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता उपाय किए जाएँ।सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि देश के अनेक युवा छात्र-वीज़ा पर पढ़ाई के लिए रूस गए थे, लेकिन वहाँ पहुँचने के बाद उन्हें बहला-फुसलाकर धोखे से रूसी सेना में जबरन भर्ती कर रूस-यूक्रेन सीमा के युद्धक्षेत्र में झोंक दिया गया। यह न केवल अमानवीय है बल्कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से समझौता है। दीपेन्द्र हुड्डा इससे पहले लगातार इस मामले को विदेश मामलों की संसदीय समिति से लेकर विदेश राज्य मंत्री के सामने उठा चुके हैं और विभिन्न स्तरों पर पत्र लिखकर सभी भारतीय युवाओं की सुरक्षित वतन वापसी के लिए प्रयास करते रहे हैं। इससे पूर्व उन्होंने सभी प्रभावित युवाओं की सूची भी सरकार को सौंपी थी। जिस पर सरकार ने कार्रवाई का भरोसा दिया था। उन्होंने कहा कि भयंकर रूप से बढ़ रही बेरोजगारी ने हमारे युवाओं को विदेश जाने पर मजबूर कर दिया है। रोजगार की तलाश में अपना देश-प्रदेश छोड़कर गए यहाँ के युवाओं को अपमान और जुल्म सहना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि काम की तलाश में विदेश गए हरियाणा के युवाओं की दुर्दशा के लिए पूरी तरह बीजेपी सरकार जिम्मेदार है। यदि सरकार नौजवानों को यहीं अपने देश में रोजगार उपलब्ध कराती तो वे अपना घर-बार छोड़कर विदेश क्यों जाते।
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