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फरीदाबाद:18 जेलों से बंदियों द्वारा निर्मित उत्पाद बने अन्तर्राष्ट्रीय सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में आकर्षण का केंद्र।

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
फरीदाबाद:“जिन हाथों ने कभी अपराध किया, आज वही हाथ सृजन के औज़ार गढ़ रहे हैं”— यह पंक्ति 39वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में हरियाणा कारागार विभाग द्वारा लगाए गए स्टॉल पर पूरी तरह साकार होती दिखाई दे रही है। यह स्टॉल न केवल हस्तशिल्प उत्पादों की वजह से, बल्कि अपने पीछे छिपी सुधार, पुनर्वास और परिवर्तन की प्रेरक कहानी के कारण भी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। हरियाणा सरकार बंदियों को अपराध की दुनिया से बाहर निकालकर सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन की ओर ले जाने के उद्देश्य से कारागारों में व्यापक सुधारात्मक एवं पुनर्वास कार्यक्रम संचालित कर रही है। इन्हीं प्रयासों के तहत, आलोक मित्तल, महानिदेशक कारागार, हरियाणा के कुशल नेतृत्व एवं सतत मार्गदर्शन में प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों के लिए कौशल विकास आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रभावी रूप से लागू किए जा रहे हैं।

जेल प्रशासन द्वारा बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कारपेंट्री, पेंटिंग, बेकरी, कढ़ाई, सिलाई, एलोवेरा से निर्मित उत्पाद, फर्नीचर निर्माण एवं अन्य हस्त शिल्प कार्यों का नियमित और व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से अनेक बंदी न केवल दक्ष कारीगर बने हैं, बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का भी विकास हुआ है।सूरजकुंड मेले में हरियाणा की विभिन्न जेलों के बंदियों द्वारा तैयार किए गए लगभग 110 प्रकार के फर्नीचर एवं घरेलू उपयोग की वस्तुएँ प्रदर्शनी और बिक्री के लिए उपलब्ध कराई गई हैं। स्टॉल पर ₹30 से लेकर ₹45,000 तक की वस्तुएँ रखी गई हैं, जिन्हें उनकी उच्च गुणवत्ता, टिकाऊपन और उचित मूल्य के कारण लोगों से अत्यधिक सराहना मिल रही है। दर्शक यह देखकर विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं कि जेल में प्राप्त प्रशिक्षण के माध्यम से कभी भटके हुए हाथ आज रचनात्मकता और परिश्रम से ऐसे उत्पाद तैयार कर रहे हैं, जो खुले बाजार में भी प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखते हैं।हरियाणा कारागार विभाग की ओर से इन उत्पादों के प्रदर्शन एवं बिक्री की जिम्मेदारी जिला कारागार फरीदाबाद को सौंपी गई है। प्रदेश की लगभग 18 जेलों से बंदियों द्वारा निर्मित उत्पाद इस अंतरराष्ट्रीय मेले में प्रदर्शित किए गए हैं, जो राज्य की सुधारात्मक कारागार नीति की व्यापकता और प्रभाव शीलता को दर्शाते हैं।आलोक मित्तल, महानिदेशक कारागार, हरियाणा ने कहा कि यह पहल केवल उत्पाद बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश देती है कि यदि अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो हर व्यक्ति परिवर्तन की राह पर आगे बढ़ सकता है। हरियाणा कारागार विभाग बंद कैदियों को रोज़गारोन्मुखी कौशल, आत्मसम्मान और सामाजिक स्वीकार्यता प्रदान कर उन्हें सजा के बाद समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में सराहनीय भूमिका निभा रहा है। इस प्रकार, सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में हरियाणा कारागार विभाग का यह प्रयास न केवल मेले की शोभा बढ़ा रहा है, बल्कि समाज के सामने मानवीय सुधार, पुनर्वास और विश्वास की एक सशक्त मिसाल भी प्रस्तुत कर रहा है।

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