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गुडगाँव

जनहित से जुड़े संस्थानों को स्वतंत्र फीडर से ड्यूल सोर्स सप्लाई की अनुमति – विक्रम सिंह

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट 
गुरुग्राम:दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) ने माननीय हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) के आदेश के अनुपालन में एक से अधिक स्रोतों से बिजली आपूर्ति (ड्यूल सोर्स सप्लाई) को लेकर नया सेल्स सर्कुलर जारी किया है। यह आदेश आयोग द्वारा 13 मई 2025 (केस नंबर एचईआर सी/पी 72 ऑफ 2024) में पारित किया गया था।प्रबंध निदेशक विक्रम सिंह के निर्देशानुसार जारी निर्देशों के अनुसार, जनहित से जुड़े संस्थानों जैसे सरकारी या निजी अस्पताल, सिंचाई नहर सेवाएं, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन आदि को तकनीकी व्यवहार्यता के आधार पर 11 केवी या उससे अधिक वोल्टेज स्तर पर स्वतंत्र फीडर से ड्यूल सोर्स सप्लाई की अनुमति दी जा सकती है। यह सुविधा उपभोक्ता के अनुरोध पर तथा उसके खर्च पर प्रदान की जाएगी।

उन्होंने स्पष्ट किया गया है कि ड्यूल सप्लाई व्यवस्था में एक स्रोत को प्राथमिक तथा दूसरे को स्टैंडबाय के रूप में नामित किया जाएगा। दोनों स्रोतों का एक साथ उपयोग प्रतिबंधित रहेगा और लोड को विभाजित नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए उपभोक्ता परिसर में इंटरलॉकिंग सिस्टम या ऑटोमैटिक ट्रांसफर स्विच लगाना अनिवार्य होगा, ताकि दोनों सप्लाई आपस में मिश्रित न हों।डीएचबीवीएन पीआरओ संजय चुघ ने बताया कि बिलिंग व्यवस्था के तहत उपभोक्ता परिसर में परिवर्तन के बाद कॉमन मीटर लगाया जाएगा, जबकि सब-स्टेशन स्तर पर लगे दोनों मीटरों की खपत को जोड़कर बिल तैयार किया जाएगा। यदि सप्लाई अलग-अलग ट्रांसफॉर्मर/ बे या अलग सब-स्टेशनों से दी जाती है और दोनों स्रोतों पर लोड आरक्षित रखा जाता है, तो प्रत्येक स्रोत पर निर्धारित फिक्स्ड चार्ज लागू होंगे। हालांकि,यदि एक ही सब-स्टेशन के अलग-अलग बे से सप्लाई दी जा रही हो और अलग-अलग लोड आरक्षण की आवश्यकता न हो, तो इसे एकल स्रोत माना जाएगा और सामान्य फिक्स्ड चार्ज ही लागू होंगे।सर्कुलर में जारी अन्य शर्तों में यह भी कहा गया है कि सप्लाई से संबंधित पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर उपभोक्ता के खर्च पर बनाया जाएगा। ऊर्जा प्रवाहित करने से पहले मुख्य विद्युत निरीक्षक,हरियाणा सरकार से निरीक्षण अनिवार्य होगा। ऊर्जा प्रवाहित होने के बाद यह प्रणाली निगम की संपत्ति मानी जाएगी, जिसके लिए उपभोक्ता से लिखित अंडरटेकिंग ली जाएगी। यदि एचवीपीएन सब-स्टेशन शामिल है तो लोड स्वीकृति से पहले एनओसी लेना भी जरूरी होगा।डीएचबीवीएन ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रत्येक मामले में होल टाइम डायरेक्टर्स (डब्ल्यूटीडी) केस के गुण-दोष के आधार पर, मुख्य अभियंता पीडी एंड सी, डीएचबीवीएन द्वारा स्वीकृत डिजाइन व ड्रॉइंग के बाद ही अलग स्रोत से सप्लाई की अनुमति देंगे। इस संबंध में पूर्व में जारी सेल्स सर्कुलर नंबर डी-27/2012 और डी-43/2012 को निरस्त कर दिया गया है। डीएचबीवीएन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इन निर्देशों का सावधानीपूर्वक एवं सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

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