
अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
चंडीगढ़:सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने HPSC PGT भर्ती में पिछड़ा वर्ग (BC-A/BC-B) के अभ्यर्थियों के साथ प्रमाण पत्र की आड़ में किए जा रहे भेदभाव व अन्याय पर गंभीर आपत्ति जताते हुए कहा कि हरियाणा के पिछड़े समाज के ऐसे अभ्यर्थी, जो सामान्य श्रेणी में भी अपनी योग्यता पूरी करते हैं, को पूरी तरह भर्ती प्रक्रिया से बाहर करना न केवल उनके आरक्षण के अधिकार का हनन है, बल्कि उनके साथ घोर अन्याय भी है। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने मांग करी कि हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) PGT भर्ती प्रक्रिया में पिछड़ा वर्ग (BC-A/BC-B) के सभी योग्य अभ्यर्थियों की मांग पर सकारात्मक समाधान निकाले। दीपेन्द्र हुड्डा ने यह भी कहा कि ऐसा लगता है कि HPSC हरियाणा की नौकरियां “हरियाणा से बाहर” देने की तैयारी कर रहा है। क्योंकि इससे पहले बिजली विभाग(HPU) की AE/SDO की भर्ती में Document Verification हेतु सामान्य वर्ग के बुलाए गए 214 अभ्यर्थियों में सिर्फ 29 हरियाणा के थे। एक तरफ प्रदेश का नौजवान डंकी से पलायन कर रहा है दूसरी तरफ BJP सरकार नौकरियों का पलायन प्रदेश से बाहर कर रही है।
सांसद दीपेंद्र हुड्डा से HPSC PGT भर्ती के अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल जिसमें सुशील सोनी, अशोक कुमार, सुधीर, पल्लवी, रंजन, धर्मवीर, राकेश शामिल थे ने बताया कि HPSC ने 23 जुलाई 2024 को विज्ञापन संख्या 18 से 37/2024 के अंतर्गत PGT के विभिन्न पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया आरंभ की थी, जिसकी अंतिम तिथि पहले 14 अगस्त 2024 और बाद में बढ़ाकर 20 अगस्त 2024 की गई। इस भर्ती के तहत सभी अभ्यर्थियों से वर्ष 2024-25 के लिए BC-A/BC-B प्रमाण पत्र मांगे गए, जो हरियाणा सरकार के दिनांक 16 जुलाई 2024 के पत्र के अनुसार होने थे, जिसमें क्रीमी लेयर की आय सीमा 6 लाख से बढ़ाकर 8 लाख रुपये की गई थी। विज्ञापन में प्रमाण पत्र की तिथि को लेकर स्पष्टता न होने के कारण अनेक अभ्यर्थियों ने 2024-25 के लिए वैध प्रमाण पत्र संलग्न किए, जो हरियाणा सरकार की अधिसूचना के अनुसार 01/04/2024 से 31/03/2025 तक पूर्णतः मान्य थे। इसके बावजूद आयोग ने इन अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया, जो सरासर अन्याय है।

उन्होंने बताया कि कई ऐसे अभ्यर्थी हैं जो आरक्षित श्रेणी के साथ ही सामान्य श्रेणी की कट ऑफ से भी ज्यादा नंबर लेकर स्क्रीनिंग, विषय ज्ञान परीक्षा और साक्षात्कार सहित भर्ती के प्रत्येक चरण को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं और पिछले एक वर्ष से नियुक्ति की प्रतीक्षा में हैं। इसका उदाहरण देते हुए कहा कि गणित विषय की अभ्यर्थी पल्लवी रानी को 80.45 नंबर मिले और सामान्य श्रेणी में कट ऑफ 69.13 होने के बावजूद पल्लवी रानी को जनरल श्रेणी से भी बाहर कर दिया गया। इसी तरह काजल (कॉमर्स), रोहित सोनी, अनिशा सैनी, संगीता कुमारी, दीप्ति यादव, पूनम कुमारी, सुनील कुमार, संजय शर्मा आदि को भी आरक्षित श्रेणी के प्रमाण पत्र के नाम पर सामान्य श्रेणी से भी बाहर कर दिया गया। इतना ही नहीं, पिछली भर्ती प्रक्रियाओं में — यहां तक कि विधानसभा चुनाव से पहले हुई भर्तियों में भी – आयोग ने साक्षात्कार के समय नये प्रमाण पत्र स्वीकार कर अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी थी। यदि उस समय नियमों में लचीलापन संभव था, तो अब पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव क्यों किया गया?
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