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लोकसभा और राज्यसभा का मानसून सत्र शुरु होने वाला है, इस सत्र में, जो 11 अध्यादेश में से 3 का विरोध करेंगें -कांग्रेस-देखें वीडियो

अजीत सिन्हा की रिपोर्ट
नई दिल्ली:जयराम रमेश ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि जैसा कि आप जानते हैं कल लोकसभा और राज्यसभा का मानसून सत्र शुरु होने वाला है। इस सत्र में, जो 11 अध्यादेश प्रख्यापित किए गए हैं पिछले 3-4 महीनों में, वो पेश किए जाएंगे पार्लियामेंट में विधेयक के रुप में। इन 11 अध्यादेशों पर कांग्रेस पार्टी की क्या सोच है, क्या विचार है, क्या स्टैंड रहेगा लोकसभा में, राज्यसभा में, उस पर मैं आज आपके सामने जानकारी रखना चाहता हूं।
पहले तो मैं कह दूँ कि 3 अध्यादेशों का हम बिल्कुल स्पष्ट तरीके से विरोध कर रहे हैं, इसमें कोई किंतु नहीं है, परंतु नहीं है, स्पष्ट तरीके से, 100 प्रतिशत कृषि संबंधित 3 अध्यादेश, जो जारी किए गए थे, इसके हम खिलाफ हैं। जैसा कि आप लोग जानते होंगे ये 2 अध्यादेश एग्री मार्केटिंग पर हैं और तीसरा वाला इसेंशियल कमोडिटी कानून पर है। इसके संबंध में हमारे मुख्यमंत्री, पंजाब के मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री, राजस्थान के मुख्यमंत्री, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री, सब लोगों ने प्रधानमंत्री को खत लिखा। पंजाब के विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पारित किया गया था, इसके खिलाफ। तो हमारा ये मानना है कि ये तीन कृषि संबंधित अध्यादेश किसानों के हित में नहीं है, किसान संगठन भी इसका विरोध कर रहे हैं, कई प्रदेशों में और जो कृषि पर आधारित राज्य हैं, पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, इनके रेवेन्यू पर भी काफी नकारात्मक असर पड़ेगा। इससे सिर्फ निजी कंपनियां फायदा उठा सकती है, कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग होगा, कॉर्पोरेट फार्मिंग होगा और जो पिछले 50 सालों में एक हमारी प्रणाली है, एमएसपी की प्रणाली, न्यूनतम समर्थन मूल्य की प्रणाली, उसको खत्म किया जा रहा है। पब्लिक प्रोक्य़ोरमेंट और फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, जो अनाज खरीदती है, सार्वजनिक वितरण के लिए, उसको भी खत्म किया जा रहा है। जनवरी, 2015 में हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के सांसद शांता कुमार जी के नेतृत्व में एक समिति की एक रिपोर्ट फाईनेलाइज की गई थी, वो रिपोर्ट सरकार को भी पेश की गई थी और उसी रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर ये अध्यादेश आए हैं और हमारा ये मानना है, जैसा कि मैंने कहा मैं फिर से दोहराऊंगा, इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए, हम इसका कड़ा विरोध करेंगे, हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, सभी राज्यों में इसके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं और एमएसपी और पब्लिक प्रिक्योरमेंट, जो हमारे खाद्य सुरक्षा के स्तंभ हैं, वो ना केवल कमजोर होंगे, बल्कि वो खत्म हो जाएंगे, तो ये किसानों के हित में नहीं है। जिन राज्यों में कृषि से उनकी आमदनियों में फायदा होता है, जैसा मिसाल के तौर से पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, इन राज्यों के खिलाफ है। सबसे बड़ी बात केन्द्र सरकार ने राज्य सरकारों के साथ कोई विचार-विमर्श नहीं किय़ा। कृषि तो एक राज्यों की सूची में आती है, संविधान में, पर ये कृषि संबंधित अध्यादेश के बारे में अफसरों के स्तर पर या मंत्रियों के स्तर पर कोई विचार-विमर्श नहीं हुआ और अचानक ये अध्यादेश प्रख्यापित किए गए। तो इन 3 कृषि अध्यादेशों का हम बिल्कुल स्पष्ट तरीके से विरोध करेंगे।

एक और अध्यादेश है, जो वित्त मंत्रालय से संबंधित है, बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में जो संशोधन किया जा रहा है, उसका भी बिल्कुल स्पष्ट तरीके से विरोध करते हैं। ये बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के तहत सारे सहकारी बैंक, कॉपरेटिव बैंक जो हैं, जिस पर आज राज्य सरकारों का रेगुलेशन चलता है, वो सारे के सारे बैंकों का रेगुलेशन अभी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया करेगा और जो कॉपरेटिव बैंक की सदस्यता है, उसमें भी बदलाव लाया जा रहा है, ताकि जो किसान नहीं है, जो कॉपरेटिव के मैंबर नहीं हैं, उनको भी शेयर इन बैंकों में मिल सकता है। ये राज्यों के खिलाफ है, ये संविधान के खिलाफ है और जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, आप जानते हैं कई बैंक बंद हो गए हैं, कई रेगुलेशन के बावजूद, तो ऐसा कहीं लिखा हुआ नहीं है कि जो निगरानी का काम आरबीआई करता है, वो कोई मजबूती से करता है। तो इस अध्यादेश का भी हम बिल्कुल स्पष्ट तरीके से विरोध कर रहे हैं। तो 11 में से 4 ऐसे अध्यादेश हैं, 3 कृषि संबंधित और एक बैंक रेगुलेशन एक्ट संशोधन के संबंधित आर्डिनेंस, हम इनका स्पष्ट विरोध करेंगे। बाकी रहे 7 अध्यादेश, दो अध्यादेश ऐसे हैं, जो सांसद और मंत्रियों के वेतन में 30 प्रतिशत की कटौती कर रहे हैं, हम उसका पूरा समर्थन कर रहे हैं, पर हम दो सवाल उठा रहे हैं, इस संदर्भ में। हम इन अध्यादेशों का समर्थन करेंगे, पर हम दो सवाल उठा रहे हैं सरकार से, एक जो जब एमपी का वेतन कट रहा है, 30 प्रतिशत काट रहे हैं और काटना भी चाहिए, साथ-साथ आप 20,000-25,000 करोड़ लेकर सेंट्रल विस्टा रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट की शुरुआत आप कर रहे हैं। तो एक तरफ आप कह रहे हैं कि सरकार की तिजोरी में पैसा नहीं है और दूसरी तरफ आप 20-25 हजार करोड़ का जो रिडेवलपमेंट, पुनर्निर्माण हो रहा है, राजपथ की ओर से सरकारी दफ्तरों, कार्यालयों का, वो क्यों चल रहा है? दूसरी बात कांग्रेस पार्टी जो दो साल के लिए एमपी लैड पर एक मोरेटोरियम लगाया गया है, फ्रीज़ लगाया गया है और कहा गया है कि दो साल के लिए एमपी लैडस के लिए पैसा नहीं दिया जाएगा, इसका भी हम विरोध कर रहे हैं, क्योंकि कई ऐसे विकास के काम चल रहे हैं, सड़कें बन रही हैं, बिल्डिंगें बन रही हैं, स्कूल के लिए, प्राइमरी हेल्थ सेंटर के लिए, गोदाम के लिए, समुदाय के भवन के लिए और ये सब काम रुके पड़े हुए हैं, क्योंकि सरकार ने कहा है कि अगले दो साल के लिए एमपी लैडस के लिए पैसा नहीं दिया जाएगा। तो इन 2 अध्यादेशों का हम समर्थन करेंगे, पर ये दो सवाल भी साथ-साथ हम संसद में उठाएंगे। दो और ऐसे अध्यादेश हैं, एक आयुर्वेद काउंसिल का है, एक होम्योपैथिक काउंसिल का है, वो काउंसिल का सरकार अधिकार ले रही है अपने हाथों में, पुनर्गठन के लिए, हम इसका विरोध नहीं करेंगे और हम इन दो अध्यादेशों का समर्थन करेंगे।दो और वित्त मंत्रालय से संबंधित अध्यादेश है, एक इन्सॉल्वेंसी और बैंक्रप्सी कोड कोड में कुछ संशोधन लाए जा रहे हैं

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