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मध्यप्रदेश का सियासी घमासान: बागी विधायकों से मिलने बेंगलुरु पहुंचे दिग्विजय सिंह, पुलिस ने एहतियातन हिरासत में लिया

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह बुधवार को बागी कांग्रेसी विधायकों से मिलने के लिए बेंगलुरु के रिसॉर्ट पहुंचे. वह यहां कांग्रेस के बागी विधायकों से मिलने पहुंचे थे. हालांकि पुलिस ने उन्हें विधायकों से मिलने नहीं दिया और एहतियाती तौर पर हिरासत में ले लिया है. हालांकि उन्हें थोड़ी देर में छोड़ दिया जाएगा. उनके साथ कर्नाटक कांग्रेस के प्रमुख डी.के.शिवकुमार भी हैं. हालांकि,उन्हें एहतियातन हिरासत में नहीं रखा गया है. दिग्विजय सिंह बुधवार सुबह बेंगलुरु के उस रिसॉर्ट पहुंचे थे, जहां 21 बागी विधायकों को रखा गया. कथित तौर पर पुलिस ने उन्हें विधायकों से मिलने नहीं दिया. जिसके बाद वह होटल के बाहर ही धरने पर बैठ गए. उनके साथ डीके शिवकुमार सहित पार्टी के कई नेता हैं.

दिग्विजय सिंह ने कहा, “हम विधायकों के वापस आने की उम्मीद कर रहे थे. मैंने व्यक्तिगत रूप से पांच विधायकों से बात की है. उनका कहना है कि उन्हें कैद करके रखा गया है और उनके फोन भी छीन लिए गए हैं.हर कमरे के बाहर पुलिस तैनात है.24 घंटे उन पर नजर रखी जा रही है.”इस से पहले मंगलवार को कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. मध्यप्रदेश कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. याचिका में कांग्रेस ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 16 विधायकों को कब्ज़े में रखा है. साथ ही याचिका में कहा है कि 16 विधायकों की अनुपस्थिति में बहुमत परीक्षण नहीं हो सकता. कांग्रेस पार्टी ने फ्लोर टेस्ट के लिए राज्यपाल के निर्देश पर भी सवाल उठाया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि कमलनाथ सरकार पहले ही सदन में बहुमत खो चुकी है.
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार और कर्नाटक सरकार को आदेश दे कि वो मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों को 16 विधायकों से मिलने और बात करने की इजाजत दे जो कांग्रेस पार्टी के सदस्य हैं. इस तरह कांग्रेस के 16 विधायकों को बंधक रखना गैरकानूनी, असंवैधानिक है और संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 और कानून के शासन के खिलाफ है. कांग्रेस ने अदालत से कहा कि 15 वीं मध्य प्रदेश विधान सभा के चल रहे बजट सत्र में भाग लेने के लिए विधायकों को सक्षम किया जाए और अनुमति दी जाए. सुप्रीम कोर्ट आदेश जारी करे कि विश्वास मत तभी हो सकता है जब 15वीं मध्य प्रदेश विधानसभा के सभी निर्वाचित विधायक उपस्थित हों. सुप्रीम कोर्ट से आदेश मांगा गया है कि राज्यपाल के निर्देश को अवैध, असंवैधानिक घोषित किया जाए

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