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एक ऐसे ऑटो ड्राइवर की संपत्ति का पर्दाफ़ाश किया है जिसके पास हजारों, लाखों में नहीं, बल्कि करोड़ों की संपत्ति मिली है.

बेंगलुरु में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एक ऐसे ऑटो ड्राइवर की संपत्ति का पर्दाफ़ाश किया है जिसके पास हजारों, लाखों में नहीं, बल्कि करोड़ों की संपत्ति मिली है. इनकम टैक्स अफसर इसलिए भी हैरान हैं क्योंकि ऑटो चालाक ने 2 करोड़ का विला खरीदा है वो भी कैश पेमेंट करके. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2 करोड़ का विला खरीदने वाले शख्स का नाम नलुरल्ली सुब्रमणी है. बताया जा रहा है कि नलुरल्ली सुब्रमणी ऑटो चलाता रहा, लेकिन अचानक उसके पास बेशुमार दौलत आ गई. उसने बेंगलुरु के पॉश इलाके व्हाइटफील्ड में 2 करोड़ का विला खरीदा. इस विला के खरीदते ही नलुरल्ली सुब्रमणी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नजर में आ गए. अफसर भी उनकी दौलत देखकर हैरान थे. इसके बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से नलुरल्ली सुब्रमणी को एक नोटिस भेजा गया, जिसका उन्होंने जवाब नहीं दिया तो 16 अप्रैल को डिपार्टमेंट ने उसके विला पर छापा मारा.

वहीं, नलुरल्ली सुब्रमणी का तर्क भी हैरान करने वाला है.उसका कहना है कि एक अमेरिकी महिला के कारण उसकी किस्मत बदल गई. उसने महिला को कभी विला किराए पर दिलवाया था, लेकिन जब वो महिला विला छोड़कर गई तो उसने करोड़ों की दौलत उसके नाम कर दी. इसके बाद उसने ऑटो चलाना छोड़ दिया. सुब्रमणी का कहना है कि उसे जबरदस्ती इस मामले में फंसाया जा रहा है. कुछ प्रॉपर्टी डीलर उसकी तरक्की से खुश नहीं है इसलिए मुझ पर झूठे आरोप लगाए गए हैं.डेक्कन क्रॉनिकल की खबर के अनुसार, कथित रूप से सुब्रमणी ने इस डील के लिए पूरी रकम कैश में दी थी.

कहा यह भी जा रहा है कि ड्राइवर के कुछ नेताओं से लिंक हैं. क्योंकि इतनी बड़ी डील कैश करने के लिए लोग आमतौर पर लोन लेते हैं.रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि छापे के दौरान डिपार्टमेंट को कई डॉक्यूमेंट्स और 7.9 करोड़ कैश भी मिले हैं. जिसके बाद प्रोहिबिशन ऑफ बेनामी प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन के तहत जट्टी इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस भेजा गया है.


यही नहीं, डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि वह एक गैंग से जुड़ा हुआ था जो सरकारी प्रॉपर्टी पर कब्जा करके उसे ऊंचे दामों पर बेचते थे. पहले तो ड्राइवर नलुरल्ली सुब्रमणी का नाम बीजेपी कर्नाटक के जनरल सेक्रेटरी अरविंद लिंबावली के साथ जोड़ा जा रहा था. हालांकि, उन्होंने एक बयान जारी करके लिंबावली खुद को इस मामले से अलग बताया और कहा कि उन्हें राजनीतिक के कारण इस मामले में घसीटा जा रहा है.

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