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कांग्रेस: खेती विरोधी बीजेपी की ताकतें आखिर में हार ही गई, आज पीएम मोदी जी के अहंकार के हार का दिन है- वीडियो देखें

अजीत सिन्हा / नई दिल्ली
कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पत्रकारों को संबोधित कहा कि नमस्कार साथियों! खेती विरोधी भारतीय जनता पार्टी की ताकतें आखिर में हार ही गई। आज मोदी जी के अहंकार के हार का दिन है। आज किसान विरोधी भाजपाई और उनके पूंजीपति मित्रों की ताकत की हार का दिन है। आज खेत-खलिहान, पूंजीपतियों को बेचने के षडयंत्र की हार का दिन है और साथियों आज किसान, मजदूर, मंडी मजदूर और दुकानदार की जीत का दिन है। आज उन 700 से अधिक किसानों की शहादत की जीत का दिन है, जिन्होंने इस संघर्ष के दौरान शहादत दी और आज आखिर में एक साल के, 12 महीने के किसान के संघर्ष के बाद भारतीय जनता पार्टी और एक अहंकारी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को किसान और मजदूर की ड्योढी पर झुकना ही पड़ा। मगर देश भूलेगा नहीं मोदी जी कि आपने एक घृणित पाप जो किया था, अब उसे वापस लेने का निर्णय किया है और वो भी किसान को रोंदने, उसके नष्तर चुभाने और बर्बर यातनाएं देने के बाद।

अब जनता समझ गई है कि भाजपा की हार के आगे ही हिंदुस्तानियों की जीत है। अब जनता समझ गई है कि भाजपा की हार के आगे ही जनहित की जीत है। अब जनता समझ गई है कि भाजपा की हार के आगे ही किसान और मजदूर की जीत है। अब जनता समझ गई है कि भाजपा की हार के आगे ही देश की जीत है। 26 नवंबर, 2020 से, जबसे देश के 62 करोड़ किसानों ने खेती विरोधी तीन काले कानूनों के खिलाफ याचना लगाई थी, तबसे मोदी सरकार यातनाएं दे रही हैं। बर्बर लाठी चार्ज किए गए, दिल्ली के चारों तरफ के राष्ट्रीय राजमार्ग खुदवा दिए गए। राष्ट्रीय राजमार्गों पर नष्तर और भाले लगवा दिए गए। किसानों के सिर फोड़ने के आदेश दिए गए। उन्हें आतंकी कहा गया,किसान को नक्सलवादी कहा गया। हमें, किसान को गुंडा कहा गया। किसान को उग्रवादी कहा गया। किसान को आंदोलनजीवी कहा गया और कुछ गोदी मीडिया के मित्र भी मोदी सरकार के इस प्रचार में शामिल हो गए। 700 से अधिक किसानों को आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया और लखीमपुर खीरी में तो देश के गृह राज्यमंत्री के बेटे और उनके सहयोगियों ने किसानों को अपनी जीपों के टायरों के नीचे रोंद दिया। पर मोदी सरकार ने आज अपना अपराध स्वीकार किया है। अब बारी है किसानों के साथ, मजदूरों के साथ, मेहनतकशों के साथ, इस देश का पेट पालने वाले लोगों के साथ मिलकर अपराध की सजा तय करने की, जो देश की जनता हर हाल में तय करेगी।

जनता को अब एक अचूक अस्त्र मिल गया है, सरकार को परास्त करने का। जितना श्रेय हमारे किसानों के आंदोलन को जाता है, हमारे किसान भाईयों को जाता है, वहाँ मोदी सरकार का 5 राज्यों में, पंजाब से उत्तर प्रदेश तक हारने के डर को भी जाता है। अब जनता समझ गई है, इसलिए मैंने कहा कि भाजपा की हार के आगे ही देश की जीत है।
पिछले 7 सालों से लगातार मोदी जी और उनके मित्रों ने किसानों का दमन किया। सरकार में आते ही प्रधानमंत्री मोदी जी ने किसान को उनकी फसल पर दिए जाने वाला बोनस बंद कर दिया। प्रांतों को कहा कि अगर बोनस दोगे तो न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद नहीं होगी। मैं फिर याद कराऊं,पिछले 7 सालों में जो किसानों का उचित मुआवजा अधिकार कानून जो कांग्रेस लाई थी, उसे खत्म करने का षडयंत्र किया गया। जब उन अध्यादेशों के खिलाफ समूचा विपक्ष राहुल गांधी जी के नेतृत्व में रामलीला ग्राउंड से खेत-खलिहान तक लड़ा, तो वो अध्यादेश वापस लेना पड़ा।किसानों को उनकी लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफा देने का वायदा करके सत्ता में आए मोदी जी ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र देकर कहा कि लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफा कभी दिया नहीं जा सकता। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को प्राइवेट बीमा कंपनी मुनाफा योजना बना दिया गया और 27 हजार करोड़ का मुनाफा चंद मुट्ठीभर बीमा कंपनियों को कमवाया। कृषि की लागत 25,000 रुपए प्रति हेक्टेयर बढ़ा दी। खेती पर टैक्स लगाकर, खाद पर टैक्स लगाकर, कीटनाशक दवाई पर टैक्स लगाकर, ट्रैक्टर पर टैक्स लगाकर, खेती के उपकरणों पर टैक्स लगाकर और डीजल पर 3 रुपए 56 पैसे से टैक्स 28 रुपए प्रति लीटर बढ़ा कर और आय दोगुनी करने के वायदे की बजाए किसान की आय 27 रुपए प्रतिदिन रह गई।

तीन काले कानून जो मोदी जी और उनके षडयंत्रकारी पूंजीपति मित्रों की देन थे, वो तो आज हार गए, पर 5 सवालों का जवाब हमारा प्रधानमंत्री जी से आज देश के किसानों, देश के खेत मजदूरों, देश के मंडी मजदूरों, देश के मंडी के छोटे-छोटे दुकानदारों, उनके पल्लेदारों और गरीबों की ओर से हम मांगते हैं –

पहला सवाल – मोदी जी देश को आज ये भी बताइए कि न्यूनतम समर्थन मूल्य किसान को मिले, इसका रोड मैप और रास्ता क्या है?

दूसरा सवाल- किसान की आय फरवरी, 2022 तक दोगुनी करने का वायदा किया था, पर एनएसओ भारत सरकार के मुताबिक इन सारे किसान विरोधी निर्णयों के बाद किसान की औसत आय 27 रुपए प्रतिदिन और किसान का औसत कर्ज 74,000 रुपए हो गया है। तो किसान की आय दोगुनी करने का रास्ता क्या है और वो कब तक होगी?

तीसरा सवाल- किसान के इंधन, डीजल पर 3 रुपए 56 पैसे प्रति लीटर से 28 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी बढ़ा कर किसान की कमर तोड़ने का जो काम किया है, उसे वापस करने का इरादा क्या है?

चौथा सवाल – खेती पर जो टैक्स लगाया है, जीएसटी लगाया है, उससे राहत देने का रास्ता क्या है? 5 प्रतिशत खाद पर टैक्स लगा दिया, 18 प्रतिशत कीटनाशक दवाई पर लगाया, 12 प्रतिशत ट्रैक्टर और खेती के उपकरणों पर लगाया, तो खेती को टैक्स से जीएसटी जो लगाया, उससे राहत देने का इरादा क्या है?

पांचवा सवाल – सुप्रीम कोर्ट और संसद में कहते हैं किसान की कर्ज मुक्ति का पैसा नहीं, पर आपकी एनएसओ कहती है कि देश का हर किसान 74,000 रुपए के औसत कर्ज के नीचे दबा है, तो किसान की कर्जा मुक्ति की मंशा क्या है?

इन 5 सवालों का जवाब भी आपसे इस देश के 62 करोड़ अन्नदाता, मजदूर, किसान और छोटे-छोटे मंडी में काम करने वाले मंडी मजदूर और मंडी के आढ़ती दुकानदार मांगते हैं। लगे हाथ इसका जवाब भी प्रधानमंत्री देश को दें, क्योंकि अपराध तय होना है। 700 किसानों के दोषी प्रधानमंत्री, नरेन्द्र मोदी हैं। आगे आइए मोदी जी, माफी मांगिए देश के किसान से, जिसे आपने पौने बारह महीने तक दिल्ली की सीमाओं पर आपने उन्हें दर-दर की ठोकरें खाने को लाखों की संख्या में बैठने पर मजबूर किया।

मोदी जी माफी मांगिए उस अन्नदाता से, जहाँ उन 700 से अधिक किसान परिवारों से जिन्होंने आपकी हठधर्मिता के चलते, आपके राजहठ के चलते, जिन्होंने अपनी जान की कुर्बानी दिल्ली की सीमाओं पर दे दी।

माफी मांगिए मोदी जी लखीमपुरी खीरी, उत्तर प्रदेश के उन किसानों से जिनको आपके गृह राज्यमंत्री के बेटे ने जीप के टायरों के नीचे कुचल डाला।

माफी मांगिए मोदी जी उस षडयंत्र के लिए, जो मुट्ठीभर पूंजीपतियों के हाथों में खेती को बेचने का षडयंत्र मोदी जी और भाजपा ने किया था और माफी मांगिए मोदी जी देश के उन 62 करोड़ अन्नदाता से जिसकी प्रताड़ना आपने की, जिसकी यातना आपने की, जिसे आपने नक्सलवादी और उग्रवादी बताया। जिस किसान और जवान को, जवान जिसका बेटा है और किसान खुद है, जिसको आपने यातनाएं दी और जिसके रास्ते में नष्तर बिछवाए और जिसे अपने देश की राजधानी में आने पर प्रतिबंध लगाया। आज प्रधानमंत्री जी आपका माफी मांगने का दिन भी है।

उम्मीद है कि आज आप इन पांचों सवालों का जवाब भी देंगे, आज माफी भी मांगेगे, क्योंकि जनता अब जान गई है कि भाजपा की हार के आगे ही देश की जीत है।

एक प्रश्न पर कि सरकार ने तीन कृषि कानून वापस लेने का फैसला कर दिया है, इसको कांग्रेस कैसे देखती है, साथ ही अन्य राज्यों में जो चुनाव होने वाले हैं, उन पर इस फैसले का क्या असर पड़ेगा, श्री सुरजेवाला ने कहा कि आप पहले किसी की जान निकाल लीजिए और जब उसकी आखिरी सांस आ रही हो, तो फिर उसे कहिए- अच्छा, अब मैं तुम्हे जीवन दान देता हूँ और फिर कहें कि हमने तो नया जीवन निर्माण कर दिया, ये इसी प्रकार से है।

इस देश के अन्नदाता को यातना किसने दी? इस देश के अन्नदाता को, 62 करोड़ किसानों और मजदूरों को एक साल से आंदोलन की राह पर खड़ा किसने कर रखा है- मोदी जी ने। इस देश का गरीब किसान और मजदूर तिल-तिलकर क्यों मर रहा है- मोदी जी के इन काले कानूनों के अहंकार के चलते। हमारे लाखों किसान दिल्ली की सीमाओं पर पौने बारह महीने से, आंधी में, धूप में, सर्दी में, जाड़े में क्यों बैठे हैं- मोदी जी के राजहठ के चलते। 700 से अधिक किसान अगर कुर्बान हो गए, तो उनकी मौत के लिए कौन जिम्मेदार है- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिम्मेदार हैं। देश के खेत और खलिहान को मुट्ठीभर पूंजीपतियों को बेचने का षड़यंत्र किसने किया था- प्रधानमंत्री मोदी जी और भाजपा ने किया था। शर्म आनी चाहिए उन सारे मंत्रियों को जो आज श्रेय ले रहे हैं। आज उन्हें अपराध बोध होना चाहिए। आज देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने सार्वजनिक तौर से अपना अपराध स्वीकारा है और देश ने ये जाना है कि भाजपा की हार के आगे ही देश की जीत है।

मोदी जी का अहंकार हारा, तो किसान जीता। भाजपा का किसान के खेत और खलिहान के विरोध षड़यंत्र टूटा, तो किसान जीता। मोदी जी और भाजपा के पूंजीपति मित्र, जब खेत और खलिहान को नहीं खरीद पाए, तो किसान जीता। जब अहिंसा और अनुशासन और संगठन किसान का जीता, तो किसान जीता। जब गांधीवादी आंदोलन जीता, तो किसान जीता। वो लोग, जो किसान को आतंकी, उग्रवादी, अलगाववादी, गुंडे, मवाली, बदमाश, आंदोलनजीवी कहते थे, समेत प्रधानमंत्री जी के, आज जब उनको अपने शब्द वापस लेने पड़े, तो किसान जीता। तो ये श्रेय लेने का दिन नहीं, आज उन्होंने अपराध स्वीकार किया है और अब उस अपराध की सजा, देश की जनता उनको देगी।

एक अन्य प्रश्न पर कि पांच राज्यों में चुनाव है और प्रधानमंत्री मोदी जी ने हाथ जोड़कर किसानों से माफी मांगी, तो क्या ये उपचुनावों के कारण है, श्री सुरजेवाला ने कहा कि उपचुनाव में जो हुआ भाजपा के साथ, वो पूरे देश ने देखा। जिस प्रकार से इन काले कानूनों के बाद पूरे देश में जब उपचुनाव हुए, तो एक करारी हार का सामना भाजपा को करना पड़ा। जिस प्रकार से भाजपा के नेताओं को उत्तर प्रदेश हो, पंजाब हो और बाकी हमारे तीन राज्य और हों, वहाँ हार का मुंह साफ दिख रहा है, तो उन्हें लगा, घबराहट हुई, किसान के ड्योढ़ी पर झुकने को, उन्हें प्रजातंत्र में वोट सबसे बड़ी चीज है और उस वोट की ताकत ने भाजपा और मोदी जी को ये विश्वास करवा दिया कि या तो अब भी अपने षड़यंत्र को वापस ले लीजिए, वरना जनता आपको बाहर का रास्ता दिखाएगी और उस भय और डर से उन्हें अपने कदम आखिर में एक साल के राजहठ के बाद वापस लेने पड़े, इसलिए मैंने कहा कि भाजपा की हार के आगे ही किसान और देश की जीत है।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री सुरजेवाला ने कहा कि मैं ये पूछता हूँ, मोदी जी से आज, इस मंच से और देश के किसान की ओर से और खुद एक किसान हूँ, इस नाते, मोदी जी, अगर सीबीआई और ईडी के डायरेक्टर का टेन्योर, ऑर्डिनेंस से, अध्यादेश से बढ़ाया जा सकता है, तो तीन काले कानून अध्यादेश से क्यों खत्म नहीं किए जा सकते? उसके लिए संसद के सत्र का इंतजार करने की जरुरत क्या है? क्या भाजपा इसमें भी गोलमाल करने वाली है? अगर आप सीबीआई और ईडी के डायरेक्टर का समय बढ़ाने के लिए 14 दिन इंतजार नहीं कर सकते, आप अध्यादेश ले आए।

आप अगर किसान का उचित मुआवजा कानून खत्म करना हो तो संसद के सत्र का इंतजार नहीं कर सकते, अध्यादेश ले आते हैं। अगर किसान की खेती पर जीएसटी लगाना हो, तो अध्यादेश ले आते हैं। तो फिर इन काले कानूनों को अध्यादेश से क्यों खत्म नहीं किया जा सकता। सरकार चाहे तो आज अभी मंत्रिमंडल की बैठक बुलाए और खत्म कर दे। ये खेल क्या है मोदी जी, आपकी दाल में काला नहीं होता, आपकी पूरी दाल लगातार काली होती है और इसलिए एक बार फिर किसान का संशय सही है। मजदूर का, मंडी के आढ़ती का, छोटे-छोटे मंडी मजदूर का संशय सही है कि कहीं इसमें एक और षड़यंत्र तो नहीं, समय बताएगा, पर हम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और एक किसान के नाते आज मैं ये पूछता हूँ कि ईडी और सीबीआई के डायरेक्टर इस देश के 62 करोड़ किसानों से बड़े हैं क्या? उनके लिए अध्यादेश आ सकता है, तो तीन काले कानून खत्म करने के लिए अध्यादेश क्यों नहीं आ सकता?

पांच सवाल हमने मोदी जी से किए हैं, उन पांच सवालों का जवाब भी दें, जिसमें पहला सवाल यही है कि किसान को एमएसपी देने का रोड़ मैप और रास्ता क्या है? किसान की आय दोगुनी होनी थी, अब 27 रुपए प्रतिदिन औसत आय हो गई, किसान की आय दोगुनी होने का रास्ता क्या है? किसान के डीजल पर 3.56 रुपए प्रति लीटर से एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर जो 28 रुपए प्रति लीटर की है, उसे वापस लेने की समय सीमा क्या है? किसान की खेती पर जो जीएसटी टैक्स मोदी जी ने लगाया है, खाद पर, बीज पर, कीटनाशक दवाई पर, ट्रैक्टर पर, उसे वापस लेने की समय सीमा क्या है? किसान की कर्ज मुक्ति की मंशा क्या है? इनका हाथों हाथ जवाब भी दे दें।

एक अन्य प्रश्न पर कि मोदी जी ने किसानों से अपील की है, वो अपने घरों को वापस लौट जाएं। कांग्रेस पार्टी को क्या लगता है, क्या किसानों को वापस अपने घरों को लौट जाना चाहिए, सुरजेवाला ने कहा कि इस देश को अब नरेन्द्र मोदी जी के वचन और बात पर विश्वास नहीं रहा। उन्होंने कहा था, अच्छे दिन आएंगे। लोग पिछले दिनों को लौटाने के लिए हाहाकार कर रहे हैं, जिस प्रकार से महंगाई और बेरोजगारी ने जनता की कमर तोड़ डाली है। वो डीजल और पेट्रोल को लेकर कांग्रेस पर हमला बोलते थे, पर वो तो अब सौ रुपए लीटर पार हो गया है। मोदी जी और उनके मित्र गैस सिलेंडर उठाकर सड़कों पर प्रदर्शन करते थे, पर सिलेंडर तो अब 1,000 रुपए प्रति सिलेंडर पार हो गया। मोदी जी तो 15-15 लाख हर खाते में डलवाते थे यों ही, जैसे उनके शब्द थे, परंतु उन्होंने तो हर आदमी की जेब से पैसा उल्टा लूट डाला। मोदी जी ने तो ये भी कहा था कि नोटबंदी के बाद कालाधन समाप्त हो जाएगा, उग्रवाद और नक्सवाद खत्म हो जाएगा, करेंसी-इन-सर्कुलेशन लगभग दोगुनी हो गई और नक्सलवाद और उग्रवाद और ज्यादा पनप गया। कालाधन तो समाप्त हुआ नहीं, जो बैंकों में धन था, वो उनके मित्र लेकर विदेश भाग गए। तो मोदी जी की बात पर और वचन पर विश्वास कौन करे, इसलिए मैंने कहा, अगर दो अफसरों का समय बढ़ाने के लिए, ईडी और सीबीआई के डायरेक्टर का अध्यादेश आ सकता है, तो 62 करोड़ किसानों औऱ मजदूरों के काले कानूनों को खत्म करने के लिए अध्यादेश क्यों नहीं आ सकता? इस बात का जवाब भी प्रधानमंत्री दे दें।

एक अन्य प्रश्न पर कि कानून तो वापस ले लिए गए हैं, लेकिन ये सुधार आगे भी चलते रहें, क्या ऐसी कोई कमेटी बनाने की मांग भी आप सरकार से करेंगे, सुरजेवाला ने कहा कि पहले तो ये जान लीजिए कि कृषि एक प्रान्तीय सब्जेक्ट है। केन्द्र का विषय नहीं है। जबरन राज्यों के अधिकारों का हनन करके, संसद को पंगु बनाकर, संसद में कानून, जो पारित नहीं हुआ, हमारे सांसद मित्रों को, उनमें से एक तो यहाँ बैठे हैं, उनको जबरन उठाकर, बाहर फेंककर कांग्रेस के हमारे साथियों को, विपक्ष के हमारे मित्रों को संसद से बाहर कर, निकालकर, बहुमत न होते हुए भी गैर कानूनी तरीके से मोदी जी ने कानून पारित करवाया था। जब सभी प्रांतों की राय एक ही हो, कृषि में तभी सुधार होना चाहिए। ये सच है पर उस सुधार की शुरुआत मोदी जी को अपने अंदर झांककर करनी पड़ेगी।

पहला सुधार, मोदी जी आपने 25 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर खेती की लागत बढ़ी दी, उसे कम करिए।

दूसरा सुधार, डीजल पर 3.56 रुपए प्रति लीटर कांग्रेस के समय में टैक्स था, अब मोदी जी 28 रुपए प्रति लीटर टैक्स लेते हैं, उसमें सुधार करिए।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसान के बजाय प्राईवेट बीमा कंपनी मुनाफा योजना बन गई और उन्होंने 28 हजार करोड़ रुपया किसान के बजाय खुद ने कमा लिया, उसमें सुधार करिए।

किसान आज कर्ज के नीचे दबा है। सोनिया गांधी जी ने, डॉ. मनमोहन सिंह जी ने, कांग्रेस की सरकार ने 72 हजार करोड़ रुपए का कर्ज माफ किया था। आप ये कहते हैं, संसद और सुप्रीम कोर्ट में किसान का कर्ज माफ नहीं हो सकता। अगर चंद उद्योगपतियों का 9 लाख करोड़ रुपया माफ हो सकता है, तो इस देश के किसान का क्यों नहीं, इसमें सुधार कीजिए। इसमे सुधार कीजिए, कि किसान की आय दोगुनी कब और कैसे होगी और उसे एमएसपी कैसे मिलेगा। आज गुरु पुरब का पवित्र दिन है, आज गुरु नानक जी का दिन है। आज तो कम से कम सच बोलिए, नहीं तो आपको ईश्वर भी कभी माफ नहीं करेगा।

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